मनरेगा योजनाओं में हितों के टकराव से बचाव के कदम
लखनऊ|उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा और विकसित भारत-रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के तहत वेंडर पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया है। अब इन योजनाओं में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवार की फर्मों को वेंडर के रूप में पंजीकरण नहीं मिलेगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इसके लिए नई गाइडलाइन जारी की है।डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए हैं कि मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी और अन्य सेवाओं की आपूर्ति में पारदर्शिता रखी जाए। किसी भी तरह की अनियमितता या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करें। उन्होंने वीबी- जीरामजी के कार्यों और उनमें उपयोग होने वाली सामग्री की आपूर्ति से संबंधित दिशा-निर्देशों पर पूरी तरह से अमल न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।इस संबंध में जिलाधिकारियों (डीएम) और जिला कार्यक्रम समन्वयकों को पहले से पंजीकृत फर्मों की दोबारा जांच करने को कहा गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार ब्लॉक प्रमुख, बीडीओ, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और अन्य संबंधित कर्मचारियों के परिवार की फर्मों पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
PAK vs SL: टी20 विश्वकप से बाहर होने के बाद सलमान आगा का नया बहाना! क्या बोले पाकिस्तान टीम के कप्तान? जानें
ZIM vs SA Playing-11: टी20 में द. अफ्रीका पर पहली जीत दर्ज कर पाएगा जिम्बाब्वे? मार्करम की टीम का पलड़ा भारी
Alyssa Healy: टीम इंडिया ने हीली को क्यों दिया 'गार्ड ऑफ ऑनर'? अपने आखिरी ODI में खेली 158 रन की ऐतिहासिक पारी
भारत-वेस्टइंडीज टी20: किसके नाम सर्वाधिक रन-विकेट? किसी कैरिबियाई ने नहीं, इस भारतीय ने जड़े सबसे ज्यादा छक्के
India-US Trade Deal: 'रूस के साथ रिश्ते पर नहीं होगा असर' अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बोले रक्षा सचिव