ITR Filing: ये 10 गलतियां कर सकती हैं आपकी जेब ढीली, बचकर रहें
नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2026 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को इस बार अपना रिटर्न तैयार करते और जमा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जरा सी लापरवाही के कारण टैक्स रिफंड अटक सकता है, आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है, या फिर आयकर विभाग की ओर से कानूनी नोटिस और भारी जुर्माना झेलना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि करदाताओं को अपनी कुल कमाई और टैक्स क्रेडिट की जानकारी का मिलान फॉर्म 26एएस (Form 26AS), एआईएस (AIS) और आयकर विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध 'प्री-फिल्ड' आंकड़ों से जरूर कर लेना चाहिए। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस मिलान से गलतियों की संभावना खत्म हो जाती है और विभाग से नोटिस आने का खतरा टल जाता है। इसके अलावा, आईटीआर दाखिल करने के बाद तय समय सीमा के अंदर उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है, वरना रिटर्न अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।
ITR दाखिल करते समय इन 10 बड़ी चूकों से बचें
-
गलत फॉर्म का चयन: यदि आपने अपनी आय के अनुसार सही आईटीआर फॉर्म नहीं चुना, तो विभाग आपके रिटर्न को त्रुटिपूर्ण (डिफेक्टिव) मान लेगा, जिससे उसकी प्रोसेसिंग रुक जाएगी।
-
आमदनी के सभी स्रोतों को छुपाना: कई लोग बैंक ब्याज, डिविडेंड, मकान के किराए, फ्रीलांसिंग या विदेशी निवेश से होने वाली कमाई की जानकारी नहीं देते हैं। ऐसा करने से टैक्स चोरी का मामला बन सकता है।
-
दस्तावेजों में विसंगति: यदि आपके फॉर्म 16, एआईएस (AIS) और फॉर्म 26एएस के आंकड़ों में अंतर पाया गया, तो गलत रिपोर्टिंग के कारण टैक्स विभाग तुरंत नोटिस भेज सकता है।
-
अवैध टैक्स छूट (डिडक्शन) का दावा: पात्रता न होने के बावजूद गलत कटौतियों का दावा करने या फिर वैध छूटों को छोड़ देने से आपकी जेब पर सीधा असर पड़ता है और विभाग की जांच का दायरा बढ़ सकता है।
-
कैपिटल गेन की गलत रिपोर्टिंग: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री से हुए मुनाफे (कैपिटल गेन) को गलत तरीके से पेश करने पर टैक्स स्क्रूटनी का सामना करना पड़ सकता है।
-
विदेशी संपत्तियों का ब्यौरा न देना: देश के बाहर मौजूद किसी भी संपत्ति या वहां से होने वाली कमाई की अधूरी जानकारी देने पर ब्लैक मनी एक्ट और इनकम टैक्स के तहत भारी पेनाल्टी लग सकती है।
-
टैक्स रिजीम का गलत चुनाव: पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था (Tax Regime) का ठीक से आकलन किए बिना रिटर्न भरने से आपका टैक्स का बोझ अनावश्यक रूप से बढ़ सकता है।
-
अंतिम तिथि (डेडलाइन) का ध्यान न रखना: तय तारीख के बाद रिटर्न भरने पर भारी लेट फीस, ब्याज और कुछ वित्तीय घाटों (Losses) को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड न कर पाने का नुकसान उठाना पड़ता है।
-
ई-वेरिफिकेशन न करना: यदि आपने रिटर्न तो सबमिट कर दिया, लेकिन तय दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना भूल गए, तो भरा हुआ रिटर्न भी रद्दी मान लिया जाएगा।
-
बैंक खाते की अधूरी या गलत जानकारी: यदि बैंक अकाउंट नंबर या आईएफएससी (IFSC) कोड गलत है, या खाता वैलिडेट नहीं है, तो आपका टैक्स रिफंड अटक जाएगा।
रिटर्न जमा करने के बाद भी जांचें आंकड़े
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि करदाताओं को केवल फॉर्म सबमिट करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि फाइलिंग के बाद भी अपने पोर्टल पर जाकर स्टेटस चेक करते रहना चाहिए। ई-वेरिफिकेशन की रसीद सुरक्षित रखना और समय-समय पर अपने रजिस्टर्ड ईमेल व मोबाइल पर आने वाले संदेशों को देखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के मिसमैच को वक्त रहते सुधारा जा सके।
अगर अनजाने में हो जाए गलती, तो क्या है उपाय?
कानूनी व टैक्स मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी करदाता से मूल (ओरिजिनल) रिटर्न दाखिल करते समय अनजाने में कोई गलती या कोई जानकारी छूट जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कानूनन, टैक्सपेयर के पास अपनी गलती सुधारने का मौका होता है। ऐसी स्थिति में करदाता को बिना समय गंवाए तुरंत 'रिवाइज्ड रिटर्न' (संशोधित रिटर्न) फाइल कर देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई या नोटिस से बचा जा सके।
70 वर्षीय महिला की संदिग्ध मौत से इलाके में फैली दहशत
महंगाई पर भूपेश बघेल का हमला- पर्ची निकालकर सस्ता करा दें पेट्रोल
संसद में विवाद गरमाया: काकोली ने कल्याण बनर्जी पर गाली-गलौज का आरोप लगाया
सोनम रघुवंशी केस में नया मोड़, मेघालय सरकार ने जमानत रद्द करने की लगाई गुहार
गर्मियों में स्कूल टिफिन के लिए हल्के और पौष्टिक खाने की लिस्ट