‘अच्छे खिलाड़ी को टीम में लाओ’, धोनी पर दादा की सोच ने जीता दिल
आईपीएल 2026 (IPL 2026) का खुमार इन दिनों क्रिकेट प्रेमियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इस सीजन में वैभव सूर्यवंशी और प्रियांश आर्य जैसे कई उभरते हुए युवा सितारों ने अपने बल्लेबाज़ी से हर किसी को प्रभावित किया है, जिसके बाद उन्हें भारतीय टीम में शामिल करने की मांग सोशल मीडिया पर तेज हो गई है। आज के दौर में खिलाड़ियों को परखने के लिए आईपीएल जैसा बड़ा मंच है, लेकिन एक दौर वह भी था जब आईपीएल का वजूद नहीं था। तब चयनकर्ता, कोच या खुद कप्तान घरेलू मैचों को देखने स्टेडियम जाते थे ताकि सही प्रतिभा को सही समय पर तराशा जा सके।
भारतीय क्रिकेट को आक्रामकता सिखाने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी उन्हीं कप्तानों में शुमार थे, जो खुद मैदान पर जाकर खिलाड़ियों का हुनर देखते थे। गांगुली ने ही महेंद्र सिंह धोनी की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें टीम में मौका दिया। हाल ही में राज शमानी के पॉडकास्ट में 'दादा' ने उस दौर की एक बेहद दिलचस्प कहानी साझा की है कि कैसे उन्होंने धोनी को पहली बार देखा और तुरंत टीम इंडिया में शामिल कर लिया।
जमशेदपुर के मैदान पर दादा ने की थी धोनी की 'सीक्रेट' खोज
पॉडकास्ट के दौरान जब सौरव गांगुली से पूछा गया कि टीम मैनेजमेंट ने एमएस धोनी को कैसे खोजा था? तो गांगुली ने मुस्कुराते हुए पुराना किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया, 'मैं महेंद्र सिंह धोनी का खेल देखने खुद जमशेदपुर गया था और इस बात की खबर खुद धोनी को भी नहीं थी। दरअसल, सबा करीम ने मुझसे कहा था कि बिहार (अब झारखंड) का एक लड़का है जो बहुत लंबे-लंबे छक्के मारता है, उसे एक बार जरूर देखना चाहिए। बस, मैंने वहीं से उन्हें नोटिस किया और तुरंत इंडिया-ए की टीम में शामिल कर लिया। इंडिया-ए की तरफ से उन्होंने अपना पहला मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला था, तब मैं भी उस टीम का हिस्सा था। उस मुकाबले में धोनी ने शानदार शतक जड़ा और गेंद को स्टेडियम की छत पर पहुंचा रहे थे। इसके बाद तो उन्हें सीनियर टीम इंडिया में लाना ही था।'
'प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मैच्योर होने के इंतजार में छोड़ना नहीं चाहिए'
गांगुली ने इंटरव्यू में इस बात पर भी जोर दिया कि क्यों असाधारण प्रतिभा वाले खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में ज्यादा समय तक नहीं रोकना चाहिए और उन्हें जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका देना चाहिए। दादा ने कहा, 'जो खिलाड़ी बेहतरीन है, उसे तुरंत फास्ट-ट्रैक (आगे बढ़ाना) करना बेहद जरूरी है। आप उसे निचले स्तर पर नहीं छोड़ सकते।'
जब होस्ट ने उनसे सवाल किया कि क्या उस खिलाड़ी के पूरी तरह मैच्योर (अनुभवी) होने का इंतजार नहीं करना चाहिए? तो गांगुली ने बड़ा ही व्यावहारिक जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'अगर आप इंतजार करेंगे, तो वह खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट के चक्रव्यूह में ही खत्म हो जाएगा। जब आप अपने से ऊंचे स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलते हैं, तो आपका खेल अपने आप सुधरता है। इसके विपरीत, अगर आप लगातार नीचे के स्तर पर ही खेलते रहेंगे, तो आपका खेल भी उसी स्तर का रह जाएगा।'
सोशल मीडिया पर दादा की दूरदर्शिता की तारीफ
सौरव गांगुली के इस इंटरव्यू का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्रिकेट फैंस 'दादा' की इस दूरदर्शी सोच की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
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एक यूजर ने लिखा, 'दादा की इसी बेबाक और पारखी सोच ने भारतीय क्रिकेट को एक आक्रामक और मजबूत टीम बनाने की नींव रखी।'
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कुछ फैंस का कहना है कि अगर दादा ने उस वक्त धोनी पर भरोसा नहीं जताया होता, तो शायद आज भारतीय क्रिकेट का इतिहास कुछ और होता।
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एक अन्य क्रिकेट प्रेमी ने कमेंट किया, 'एक सच्चे और महान लीडर की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि वह भीड़ में से भी असली टैलेंट को पहचान लेता है और गांगुली की नजरें कमाल की थीं।'
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