नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी समूह से जुड़ी विभिन्न कंपनियों और उनके पूर्व उच्चाधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो अलग-अलग गंभीर मामलों में विशेष अदालतों में चार्जशीट दाखिल की है। पहले मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और समूह के पूर्व अधिकारी सतीश सेठ सहित अन्य के खिलाफ दिल्ली की द्वारका स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दर्ज कराई गई है, जबकि दूसरे मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार इन दोनों मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन और धन के अवैध डायवर्जन की गहराई से जांच की जा रही है।

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े 187 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला

एजेंसी के मुताबिक पहला मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा फरवरी माह में दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की चार प्रमुख टोल सड़क परियोजनाओं—त्रिची-करूर, त्रिची-दिंडीगुल, सेलम-उलुंदरपेट और जयपुर-रींगस—से जुड़े फंड में लगभग 187 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई है। ईडी का गंभीर आरोप है कि सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी उप-ठेकेदारी (सब-कॉट्रैक्टिंग) के काम दिखाकर और बैक-डेटेड दस्तावेजों के सहारे इन करोड़ों रुपयों को विभिन्न शेल कंपनियों और संस्थाओं के माध्यम से इधर-उधर ट्रांसफर किया गया, जिनका वास्तविक सड़क निर्माण कार्य से कोई लेना-देना नहीं था।

रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में 40 हजार करोड़ से अधिक की वित्तीय जांच

दूसरे बड़े मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस टेलीकॉम जैसी कंपनियों के अलावा सतीश सेठ, गौतम दोशी और अमिताभ झुनझुनवाला जैसे पूर्व अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि नई क्रेडिट सुविधाओं के जरिए जुटाई गई भारी-भरकम राशि का उपयोग पुरानी देनदारियों को चुकाने और कॉरपोरेट कर्ज को घुमाने के लिए किया गया। इस पूरे मामले में अपराध से अर्जित कुल राशि का आंकड़ा लगभग 40,185 करोड़ रुपये आंका गया है, जिसमें से एजेंसी ने अब तक करीब 8,078 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से कुर्क (अटैच) किया है।

पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी और विदेशों में संपत्ति खरीदने के आरोप

जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्तता पाए जाने पर पूर्व अधिकारी सतीश सेठ और गौतम दोशी को जून माह में केंद्रीय एजेंसी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत जेल में हैं। रिकॉर्ड के अनुसार गौतम दोशी ने वर्ष 2020 में और सतीश सेठ ने वर्ष 2025 में अनिल अंबानी समूह से अपनी विदाई की जानकारी दी थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि लोन के पैसों को समूह की अन्य सहयोगी कंपनियों में मोड़ने के साथ-साथ कुछ धनराशि का उपयोग विदेश में प्रमोटरों द्वारा निजी संपत्तियां खरीदने के लिए भी किया गया था।