जल गंगा संवर्धन अभियान: नर्मदा घाटी की नहरों का बदला स्वरूप, 246 किमी क्षेत्र में सफाई और पौधारोपण पूरा

# Keval Krishna Tripathi

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक 'जल गंगा संवर्धन अभियान' (19 मार्च से 30 जून 2026) के तहत नर्मदा घाटी विकास विभाग (NVDA) ने जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सतत विकास और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए विभाग ने अपनी विभिन्न नहर प्रणालियों का कायाकल्प कर दिया है।

246 किलोमीटर क्षेत्र में झाड़ियों की सफाई
अभियान के तहत विभाग ने कुल 246 किलोमीटर लंबी नहर प्रणालियों से घास, जंगली झाड़ियां और छोटे पेड़ों को पूरी तरह साफ कर दिया है। इस सफाई कार्य से पानी का प्रवाह सुगम होगा और जल की बर्बादी रुकेगी। 

इस प्रमुख परियोजनाओं में हुआ संपन्न
•    नर्मदा परियोजना, इंदौर
•    अपर नर्मदा जोन, जबलपुर
•    रानी अवंतिका बाई सागर परियोजना
•    इंदिरा सागर परियोजना

इस कार्य से प्रदेश के खरगोन, धार, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, खंडवा और बड़वानी जिले सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं।

शहरी क्षेत्रों में 228 किमी नहरों का सौंदर्यीकरण
नहरों को गंदा होने से बचाने और जल शुद्धिकरण के लिए विभाग ने शहरी तथा आवासीय क्षेत्रों से गुजरने वाली प्रमुख नहरों को चिन्हित किया। इन क्षेत्रों में रिकॉर्ड 228 किलोमीटर के दायरे में नहरों की विशेष सफाई, शुद्धिकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया, जिससे रिहायशी इलाकों में जलभराव और गंदगी की समस्या से मुक्ति मिलेगी।

अतिक्रमण रोकने के लिए 'ग्रीन फेंसिंग' और बफर जोन
जल संरचनाओं की सुरक्षा और उनके किनारों पर होने वाले अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए विभाग ने एक अनूठी पहल की है। जल स्रोतों के किनारों पर बफर जोन तैयार किए गए हैं। इन किनारों को सुरक्षित करने के लिए जैविक फेंसिंग (बाड़) के रूप में 1,735 पौधे रोपे गए हैं।
स्पंज की तरह काम करेंगे पेड़: भूजल स्तर में होगा सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार, लगाए गए ये पौधे भविष्य में एक 'स्पंज' की तरह काम करेंगे। ये बारिश के पानी को रोककर जमीन के भीतर (Groundwater रिचार्ज) भेजेंगे, जिससे आसपास के कुओं और बावड़ियों का जलस्तर बढ़ेगा। इस दूरदर्शी प्रयास से आने वाले कई वर्षों तक क्षेत्र में पानी की किल्लत नहीं होगी और मध्य प्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना रहेगा।