Kevval K. Tripathi

नई दिल्ली । ललित कला अकादमी (राष्ट्रीय कला अकादमी, नई दिल्ली) द्वारा आयोजित 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का भव्य पुरस्कार समारोह डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से अवसर को विशेष बनाया और देशभर से चयनित श्रेष्ठ कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले के वारासिवनी (Waraseoni) निवासी रवि कांत झा की चित्रकला भारतीय पौराणिक कथाओं, प्रकृति, अध्यात्म और आधुनिक जीवन का अनूठा संगम है। उनकी अर्ध-आब्सट्रैक्ट शैली, गहन प्रतीकों, गाढ़े टेक्सचर और संतुलित रंगों के माध्यम से परंपरा और आधुनिकता को जोड़ती है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और उपलब्धियाँ: रवि कांत झा ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से बी.एफ.ए. (2003) एवं एम.एफ.ए. (2005) की उपाधि प्राप्त की। अपनी कला यात्रा के दौरान उन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं, जिनमें प्रमुख हैं: 
• 2025 – छठी अखिल भारतीय कला प्रतियोगिता, चित्रमयी, स्टेट गैलरी ऑफ आर्ट, हैदराबाद में एकल प्रदर्शनी हेतु प्रायोजन पुरस्कार
• 2024 – इंडिया इंटरनेशनल एनुअल आर्ट एग्ज़िबिशन, बेंगलुरु में प्रशंसा पुरस्कार
• 2023 – राज्य संग्रहालय, शिमला द्वारा ड्रॉइंग एवं ग्राफ़िक्स पुरस्कार
• 2003 – इंदु ताई तिलक पुरस्कार, तिलक स्मारक ट्रस्ट, पुणे
• 2004 – छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मान
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (विशिष्ट अतिथि), संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल, तथा ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. नंद लाल ठाकुर भी उपस्थित रहे।
यह सफलता भारतीय कला जगत के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी भी