मध्य प्रदेश स्थाई कर्मी कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष शारदा सिंह परिहार ने बताया कि बांधवगढ़ नेशनल पार्क उमरिया के प्रबंधन की लापरवाही के चलते फिर 29 मार्च 2025 को सुरक्षा श्रमिक कॉल के गाल में समा गया।
सुरक्षा श्रमिक नागेंद्र सिंह पिता बाबू सिंह ग्राम देवरी निवासी वन परिक्षेत्र ताला कोर  जोन के आर  एफ 331 आमानाला हाथी कैंप में कार्यरत था। आज सुबह लगभग 6:00 बजे सुरक्षा श्रमिक नागेंद्र सिंह अष्टम हाथी को चारा डालने के लिए गया था तभी अचानक हाथी ने उसे पर हमला कर दिया जिससे घायल अवस्था में श्रमिक जोर-जोर से चिल्लाया बचाओ बचाओ आवाज सुनकर साथी श्रमिक पहुंच कर उसे वहां से निकला एवं घटना की गंभीरता को देखते हुए वायरलेस सेट के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा उक्त घटना को गंभीरता से नहीं लिया गया उक्त घटना स्थल ताला से मार्च 8 किलोमीटर दूर था लेकिन चिकित्सा व्यवस्था के लिए वहां एंबुलेंस की व्यवस्था में एक से दो घंटे का विलंब हुआ 2 घंटे बाद एंबुलेंस के माध्यम से घटना स्थल से लेकर उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था तब श्रमिक बोल रहा था लेकिन रास्ते में अचानक उसका बोलना बंद हो गया और अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर द्वारा उक्त श्रमिक को मृत घोषित कर दिया गया। श्री परिहार ने बताया कि यदि प्रबंधन द्वारा घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल चिकित्सा व्यवस्था करते तो श्रमिक की जान बच सकती थी।  परिहार ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा जोखिम भरे कार्य  करने के लिए मजबूर किया जाता है। उक्त हाथी द्वारा एक हफ्ते पहले उक्त तीनों श्रमिकों के ऊपर हमला किया गया था लेकिन हल्की चोटों के चलते जान बच गई थी हाथी मद में था यह बात प्रबंधन को मालूम थी इसके बावजूद भी हाथी की देखरेख के लिए हाथी विशेषज्ञों को नहीं रखा गया हाथी की देखरेख की जिम्मेदारी सुरक्षा श्रमिकों के ऊपर सौंप कर प्रबंधन में अपनी जिम्मेदारी से इति श्री कर ली। जिन सुरक्षा श्रमिकों को हाथी की देखरेख में रखा गया उन्हें हाथी के सुरक्षा के संबंध में किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता और नहीं उनकी सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में प्रबंधन द्वारा कोई व्यवस्था की जाती है। परिहार ने यह भी आरोप लगाया है की आमनाला हाथी कैंप में घटना के समय वहां पर वनरक्षक वनपाल उपवन क्षेत्रपाल जैसे जिम्मेदार कर्मचारी अधिकारी ड्यूटी पर नहीं थे। केवल सुरक्षा श्रमिकों के भरोसे मदमस्त हाथी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप कर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। श्री परिहार ने बताया की बांधवगढ़ नेशनल पार्क उमरिया में पहली घटना नहीं है प्रबंधन की लापरवाही के चलते घटनाओं का अंबार लगा हुआ है चाहे कोदो खाकर हाथियों के मरने की घटना हो या मदमस्त हाथी द्वारा गरीब मजदूर सैनिकों की हत्या हो स्वर्गीय श्री चिंता बैग की मौत बाघ की हमले से 2 अप्रैल 2019 को एवं रवि बैग की दर्दनाक मौत हाथी के हमले से 3 अक्टूबर 2019 को होने के बावजूद भी प्रबंधन द्वारा उक्त घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के संबंध में कोई कार्य योजना तैयार नहीं की गई और ना ही सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में कोई कार्यवाही की गई यदि उक्त घटनाओं से प्रबंधन सीख लेता तो आज इस घटना से श्रमिक की जान बचाई जा सकती थी।
श्री परिहार ने बताया कि इन सुरक्षा श्रमिकों से 12 से 14 घंटे प्रतिदिन कार्य लिया जाता है 24 घंटे जंगल कैंपस में रहने के लिए मजबूर किया जाता है साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिलता बीमा सुविधा चिकित्सा सुविधा अनुकंपा नियुक्ति जैसी मूलभूत सभी सुविधाओं से वंचित सुरक्षा श्रमिकों को मात्र ₹10000 मासिक वेतन दिया जाता है सुविधाओं की मांग करने पर प्रबंधन द्वारा सेवा समाप्त करने की कार्यवाही भी की जाती है मध्य प्रदेश स्थाई कर्मी कल्याण संघ द्वारा मध्य प्रदेश शासन के सभी जिम्मेदार अधिकारी एवं माननीय जनों को उक्त श्रमिकों की वस्तु स्थिति से लिखित रूप से अवगत कई बार कराया जा चुका है लेकिन शासन और प्रशासन इनके संबंध में किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई गरीब मजदूर मजबूरी के शोषण और दमन का शिकार हो रहे हैं और अपनी जान की बाजी लग रहे हैं। श्री परिहार ने विभाग के जिम्मेदार और प्रशासन से मांग की है कि उक्त घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 31 मार्च 2025 को 3:00 बजे संगठन द्वारा वन भवन कार्यालय में उक्त घटना के संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक  वन्य प्राणी एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल प्रमुख से मिलकर अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे।