जनता से वसूले गए टैक्स की राशि की कैसे हो रही बंदरबांट... इस ख़बर को पढ़ें Bhopal / Madhya_Pradesh

जनता से वसूले गए टैक्स की राशि की कैसे हो रही बंदरबांट... इस ख़बर को पढ़ें

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भोपाल। मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अधीन दो सरकारी एजेंसिया एक जैसे काम पर PWD के शैड्यूल of  रेट्स (SOR) से सिर्फ 1.85 प्रतिशत दर पर कर रही है तो दुसरी तरफ दुसरी एजेंसी उसे 24.76 प्रतिशत कम पर कर रही है। जनता से वसूले गए टैक्स की राशि का कैसे हो रहा हैं बंदरबांट इस ख़बर से जानियें। दरअसल उच्च शिक्षा विभाग एक जैसा काम को दो सरकारी एजेंसियों से करा रहा है। तुलनात्मक परिक्षण से इसमें अंतर रहा है। मीडिया रिपोट के अनुसार यह अंतर बड़ा है। 

           भोपाल में काम कर रही सरकारी एजेंसी राजधानी परियोजना राजधानी के अंदर काम करती है तो दुसरी भोपाल विकास प्राधिकरण भोपाल से बाहर के भी काम कर रही है। मामल उच्च शिक्षा विभाग के कामों में रहे एक बड़े अंतर से सामने आया है। उनके रेट में 23प्रतिशत तक का अंतर है।  बीडीए में जो कार्य पीडब्ल्यूडी के शैड्यूल of  रेट्स (SOR) से सिर्फ 1.85 प्रतिशत दर पर हो रहा है, सीपीए उसे 24.76 प्रतिशत कम पर कर रहा है। उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्मूलन परियोजना के अंतर्गत इन निर्माण कार्यों के लिए उच्च शिक्षा विभाग को भुगतान करना है। विभाग ने दोनों को ही मंजूरी दे दी।

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          भोपाल विकास प्राधिकरण को उच्च शिक्षा विभाग ने भोपाल-होशंगाबाद संभाग में लगभग 125 करोड़ रुपए के काम सौंपे गए हैं। यदि यह कार्य CPA करे तो लगभग 25 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी। BDA ज्यादातर कार्य शहर से बाहर कर रहा है और CPA के पास राजधानी के भीतर के कार्य हैं। राजगढ़ जिले के सारंगपुर, खिलचीपुर और ब्यावरा में कॉलेज भवनों के निर्माण और उनके रिनोवेशन का 1367.72 लाख रुपए का काम पीडब्ल्यूडी के एसओआर से 1.85 प्रतिशत कम पर दिया गया है। इसी आदेश में राजगढ़ के कॉलेज भवन का कार्य 682.98 लाख रुपए में आवंटित किए जाने का जिक्र है, लेकिन इसे उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बजट मंजूरी तक रोका गया है। वहीं दुसरी तरफ CPA ने राजधानी के बैरसिया रोड स्थित गीतांजलि कॉलेज के भवन निर्माण और रिनोवेशन का 723.13 लाख का काम SOR से 24.76 प्रतिशत कम पर सौंपा गया है। CPA ने हमीदिया आर्ट्स एंड कॉलेज कके भवन निर्माण और रिनोवेशन का 667.30 लाख का काम 23.76 प्रतिशत कम पर सौंपा है। अब ऐसे में विशेषज्ञ की माने तो उच्च शिक्षा विभाग को इसे मंजूरी से पहले परीक्षण कर लेना चाहिए था। उनका कहना है कि मटैरियल आदि की उपलब्धता के आधार पर रेट में कुछ अंतर सकता है। लेकिन वह 20 प्रतिशत से अधिक है तो मंजूरी से पहले परीक्षण होना चाहिए था। टेंडर दोबारा बुलवाकर भी देखे जा सकते थे। कई बार सेकंड और थर्ड कॉल में रेट कम जाते हैं।

Bhopal / Madhya_Pradesh      Oct 11 ,2020 15:18