Citizenship Amendment Bill: कई विपक्षी दल कर रहे हैं इस बिल का पुरजोर विरोध / Madhya_Pradesh

Citizenship Amendment Bill: कई विपक्षी दल कर रहे हैं इस बिल का पुरजोर विरोध

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नई दिल्ली। केंद्र में बैटी नरेंद्र मोदी सरकार संसद में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर रही है। 1955 में एक कानून बनाया गया जिसे नागरिकता अधिनियम 1955 नाम दिया गया। पहले नागरिकता अधिनियम 1955 के मुताबिक, वैध दस्तावेज होने पर ही ऐसे लोगों को 12 साल के बाद भारत की नागरिकता मिल सकती थी। लेकिन अब संशोधन के बाद ये बिल भारत में छह साल गुजारने वाले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और इसाई) के लोगों को बिना उचित दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का रास्ता तैयार करेगा। इस बिल का कई विपक्षी दल पुरजोर विरोध कर रहे हैं। कैबिनेट ने बुधवार को इस बिल को मंजूरी दी है और अब इसके संसद में पारित होने का इंतजार है। हालांकि इस बिल में पहले के मुताबिक अब कुछ बदलाव जरूर किए गए हैं. बिल के संशोधित रूप में कहा गया है कि इनर लाइन परमिट और छठी अनुसूची प्रावधानों द्वारा संरक्षित उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में यह संशोधित बिल लागू नहीं होंगा. इसमें पूरा अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, अधिकांश नागालैंड, मेघालय और त्रिपुरा और असम के कुछ हिस्से शामिल हैं. मणिपुर इस क्षेत्र का एक ऐसा राज्य है जो छूट के दायरे में नहीं आता है.

क्या है नागरिकता संशोधन बिल 2016?

भारत देश का नागरिक कौन है, इसकी परिभाषा के लिए साल 1955 में एक कानून बनाया गया जिसे श्नागरिकता अधिनियम 1955श् नाम दिया गया. मोदी सरकार ने इसी कानून में संशोधन किया है जिसे नागरिकता संशोधन बिल 2016 नाम दिया गया है. संशोधन के बाद ये बिल देश में छह साल गुजारने वाले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और इसाई) के लोगों को बिना उचित दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का रास्ता तैयार करेगा. पहले नागरिकता अधिनियम 1955 के मुताबिक, वैध दस्तावेज होने पर ही ऐसे लोगों को 12 साल के बाद भारत की नागरिकता मिल सकती थी.

/ Madhya_Pradesh      Dec 09 ,2019 05:09