सरकार की नजर में आज भी साइकिल से अपराधियों के पीछे भाग रहे पुलिसकर्मी Damoh / Madhya_Pradesh

सरकार की नजर में आज भी साइकिल से अपराधियों के पीछे भाग रहे पुलिसकर्मी

सुरेश नामदेव पथरिया :आम शहरी को चैन की नींद मुहैया कराने खुद की नींद हराम कर दिन-रात अपराधियों के पीछे दौड़ने वाले पुलिस के जवान किस बदतर हालात में पुलिस क्वार्टरों में रह रहे हैं इसका अंदाजा बिना देखे नहीं लगाया जा सकता। टूट चुके खिड़की-दरवाजों की जगह लगे कपड़े के खिड़की दरवाजे, टपकते छत, टैंक विहीन टॉयलेट, पीने के पानी की किल्लत और आवासों के पास गंदगी का आलम, यह तस्वीर है शहर के पुलिस आवासों की। जिनमें पुलिस जवान और उनका परिवार बमुश्किल गुजारा कर रहा है। आरक्षकों और उनके परिवार वालों को रहने लायक मकान तक नसीब नहीं हो पाया है। आरक्षकों का परिवार कंडम घोषित हो चुके रिजेक्ट मकानों में रहने को मजबूर हैं। शहर में बने पुलिस कॉलोनी के सभी क्वाटर पुराने और जर्जर हो चुके हैं। यहां बने पुलिस क्वाटर की मरम्मत बीते 10 साल से नहीं की गई है। मिट्टी के बने ये कच्चे मकान अब इतने ज्यादा जर्जर हो चुके हैं कि इनकी मरम्मत संभव नहीं है। बरसात में इन मकानों में रह रहे पुलिस परिवार के लोग डरे हुए हैं। तेज बारिश में कभी भी मकान गिर सकते हैं। हादसे का खतरा हर वक्त बना हुआ है। पुलिस कॉलोनी के इन मकानों की आयु 50 साल से भी अधिक हो चुकी है। यही वजह है कि पीडब्लूडी विभाग ने इन मकानों को कंडम घोषित कर दिया है। पथरिया थाना पदस्थ आरक्षकों ने बताया कि यहां के हालात वाकई में डरावने हैं। हमने पाया कि इन मकानों मेें रह रहे लोगों पर वाकई मौत का खतरा हर वक्त मंडरा रहा है। वर्तमान में मकानों की हालत यह है कि दीवारों की पपड़ी अपने आप उखड़कर गिर रही है। यहां रह रहे लोग दीवारों पर कील नहीं ठोक रहे हैं क्योंकि कील के लिए हथोड़ा मारने से पूरी दीवार में दरार आने का डर बना हुआ है। खपरैल छत की हालत भी बेहद नाजुक है। छत से पानी चूने के कारण हर घर में प्लास्टिक बांधी गई है। रात में यदि बारिश होती है तो प्लास्टिक में पानी भर जाता है और रात में कई बार उठकर पानी खाली करते हैं। पुलिस विभाग के अनुसार कुछ मकानों को कंडम घोषित कर दिया गया है लेकिन नए आवास की अनुपलब्धता होने पर इन मकानों में भी सिपाही, आरक्षक, प्रधान आरक्षक,चालक आदि रह रहे हैं।पुलिस थाना के पास स्थित बने पुलिस क्वार्टरों को कंडम घोषित कर दिया गया है लेकिन उसके बाद भी उन्हीं क्वार्टर में रहने को मजबूर पुलिस के जवान लेकिन सरकार और ऊपर बैठे अधिकारी वर्ग इस ओर कोई ध्यान नही दे रहे हैं। पथरिया में रह रहे पुलिसकर्मियों को तहसील स्तर पर हर माह 270 किराया मिलता हैं। जिसमे बिजली का बिल भी नही भर सकता और इतने रुपयों में आवास मिलना मुश्किल है। तहसील में आवास मिलना भी एक जटिल समस्या हैं। बड़ी मुश्किल से तो मकान मिलता हैं वह भी तीन हजार से चार हजार में मिलता है। सरकार बनने से पहले कमलनाथ ने अपने वचन पत्र में पुलिस मकान किराया 5000 रु देने की बात कही थी ग्रेडपे 2400, और साइकिल किराया प्रतिमाह 18 रुपये से बड़ा कर पेट्रोल भत्ता 2000 देने की बात कही थी पर एक साल होने के बाद भी यह वचन पत्र कोरा साबित हो रहा है। इस संबंध में जब हमने पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह से बात की तो उनका कहना है कि जो क्वार्टर कंडम स्थिति में है उनकी मरम्मत के लिए शासन से राशि स्वीकृत कराई गई है जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। और तहसील स्तर पर नई क्वार्टस के लिए भी शासन से बात की हैं ।
Damoh / Madhya_Pradesh      Dec 08 ,2019 08:39