जिला पंचायत सीईओ मिश्रा ने दी 10 आवेदकों को अनुकंपा नियुक्ति Damoh / Madhya_Pradesh

जिला पंचायत सीईओ मिश्रा ने दी 10 आवेदकों को अनुकंपा नियुक्ति

दमोह : कलेक्टर तरूण राठी ने दमोह में पदस्थापना के बाद प्रथम बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि अनुकंपा नियक्ति के कोई भी प्रकरण लंबित न रहे, तब से इस कार्य के निराकरण में गति आई है। ग्राम पंचायत सचिव की सेवाकाल में अचानक मृत्यु हो जाने की दशा में उनके परिवार के आश्रित सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिये जाने के निर्देश राज्य शासन द्वारा समय-समय पर दिये गये है। इसी तारतम्य में सीईओ जिला पंचायत डॉ. गिरीश मिश्रा ने जिले के विभिन्न जनपद पंचायतों की ग्राम पंचायतों में पात्र पाये गये 10 आवेदकों को राज्य शासन के अध्याधीन रहते हुये आगामी आदेश तक के लिये ग्राम पंचायत सचिव पद पर अस्थाई रूप से अनुकंपा नियुक्ति कर दी गई है। इन्हें मिली सचिव पद पर अनुकंपा नियुक्ति जनपद पंचायत दमोह की ग्राम पंचायत हथना के लिये धीरज पटैल, ग्राम पंचायत अधरौटा के लिये प्रशांत विश्वकर्मा, जनपद पंचायत पथरिया की ग्राम पंचायत जेरठ के लिये दीपेन्द्र अहिरवार, ग्राम पंचायत सासा के लिये राहुल चौरसिया, जनपद पंचायत तेन्दूखेड़ा की ग्राम पंचायत सुनवाही उमरिया के लिये शैलेजा सोनी, नरगुंवा माल के लिये रोशनी ठाकुर, जनपद पंचायत पटेरा की ग्राम पंचायत खमरिया के लिये पूरन सिंह, ग्राम पंचायत पटेरिया के लिये कैलाश सींग लोधी, ग्राम पंचायत कोटा के लिये आशीष सिंह राजपूत तथा जनपद पंचायत बटियागढ़ की ग्राम पंचायत सुनवाहा के लिये संतोष कुमार को अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। शर्ते अनुकंपा नियुक्ति प्रथमत: 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिये की गई है। परिवीक्षा अवधि सफलता पूर्वक पूर्ण करने की दशा में म.प्र. पंचायत सेवा की शर्तो के तहत पात्रता अनुसार नियमित वेतनमान दिया जायेगा। ग्राम पंचायत सचिव को नियुक्ति दिनांक से 3 वर्ष के लिये मानदेय रूपये 1600/- नियत और यात्रा भत्ता रूपये 250/- प्रतिमाह देने के प्रावधान है। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुये नियमों में संशोधन की प्रत्याशा में रूपये 10 हजार मासिक का मानदेय परिवीक्षा अवधि के लिये दिया जायेगा। मृत्यु अनुदान अनुग्रह योजनांतर्गत प्रदाय की गई राशि 10 समान किस्तों में वापस जमा करना अनिवार्य होगा। सचिव म.प्र. ग्राम पंचायत सचिव की शक्तियां तथा कृत्य नियम 1999 में विनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का निर्वळन करेगा तथा अधिनियम मे यथा विनिर्दिष्ट कार्य का संपादन भी करेगा। यदि कार्य संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो नियुक्ति कभी भी निरस्त की जा सकेगी। नियुक्ति आदेश जारी होने के दिनांक से 7 दिवस में कार्य पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा, निर्धारित समयावधि में कार्य पर उपस्थित नहीं होने पर नियुक्ति आदेश निरस्त माना जायेगा तथा अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजो या अन्य सूचनाओं के भविष्य में गलत पाये जाने पर नियुक्ति तत्काल समाप्त की जा सकेगी। अनारक्षित वर्ग के विरूद्ध नियुक्त होने की स्थिति में इस सेवा के लिये अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लाभ के लिये दावा नहीं करेंगे।
Damoh / Madhya_Pradesh      Jun 27 ,2019 13:24