विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पार्क केवल दो टेंकर के सहारे बुझा रहा वन्य जीवों की प्यास Bhopal / Madhya_Pradesh

विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पार्क केवल दो टेंकर के सहारे बुझा रहा वन्य जीवों की प्यास

RNS, शहडोल। 

विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पार्क बाघों के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व हर साल देश.विदेश के हजारों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। सीरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व दिलाता हैं। वही टाइगर रिजर्व अपने वन्यजीवों को भरपेट पानी तक उपलब्ध कराने में असमर्थ है। भीषण गर्मी में पार्क में वन्य जीवों की प्यास बुझाने का संकट है। हालांकि पार्क में पेयजल व्यवस्था के नाम पर सॉसर बनवाए गए हैंए लेकिन उनको भरने के लिए मात्र दो टेंकर है।

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  भीषण गर्मी में पार्क में वन्य जीवों को संकट में पड़ते हुआ देखा जा सकता है। हालांकि पार्क में पेयजल व्यवस्था के नाम पर सॉसर बनवाए गए हैं, लेकिन वे भी ढंग से भरे नहीं जाते हैं। वन्यजीवोंं के नाम पर पैसा पीटने वाला नेशनल पार्क वन्य जीवों की सुरक्षा के मामले में भी कारगर कदम नहीं उठा पाता है। कई वर्षों से यहां गर्मी में नदी नालों के सूख जाने से पानी का संकट उत्पन्न हो रहा है,लेकिन जिम्मेदार कोई पूर्व तैयारी नहीं करा पाते हैं। नेशनल पार्क में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था के उपाय पर्याप्त नहीं हैं। पार्क प्रबंधन ने कहने को तो वन के अंदर अनुमानित 100 की संख्या में सॉसर बनवाए हैं। लेकिन 15 सौ वर्ग किमी के वन में इतने कम सॉसर पर्याप्त नहीं माने जाते हैं। वन्यजीवों को लंबी दूरी तक जंगल में भटकनें के बाद कहीं एक सॉसर दिखाई पड़ता है।

                 9 रेंजों वाले नेशनल पार्क में पानी के 100  सॉसर भरने के लिए केवल दो टैंकर उपलब्ध हैं। यह टैंकर पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। इनकी दौड़ इतनी भी नहीं कि यह रोजाना सभी सॉसरों तक पहुंच कर उनमें पानी भर सकें। और जिन सॉसरों में पानी भर दिया जाता है उनमें दोपहर के समय पानी इतना गर्म हो जाता है कि वन्य जीव उसे ठीक से पी भी नहीं पाते हैं। गर्मी में प्यास से व्याकुल वन्यजीव पानी की तलाश में इधर उधर भटकते हुए बस्तियों की तरफ   जाते हैं।  इससे या तो उनका शिकार होता है या फिर वे कुएं में गिर जाते हैं। कुछ समय पूर्व ही घुनघुटी की एक बस्ती में दो चीतल कुंए में गिर गए थे। जिन्हे बड़ी मुश्किल से सुरक्षित निकाला गया था। गत वर्ष मगधी रेंज के एक कुएं में टाइगर गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसी तरह मानपुर नौगवां में तेंदुआ घुस गया था जिससे दो दिन तक गांव में हड़कंप मचा रहा। हर साल इस तरह की कई घटनाएं होतीं हैं। कभी कभी बस्तियों की तरफ आते समय सड़क पार करते हुए भी वन्यजीवों की मौत हो जाती है।

        पार्क के बड़े अधिकारी वन्यजीवों की पानी की व्यवस्था पर नजर रखने तो वनों के अंदर भ्रमण कर मॉनीटरिंग करते हैं और स्थिति के अनुरूप जरूरी सुधार करवाते हैं। वनों में गश्त भी नहीं होती है, केवल छोटे कर्मचारियों पर सारा भार डाल कर अधिकारी फुर्सत हो जाते हैं। बताया गया कि कई बार सूचनाएं देने के बाद भी समय पर सुधार कार्य नहीं कराए जाते हैं। अफसरों की हीलाहवाली के कारण नेशनल पार्क की स्थिति और भी खराब होती जा रही है।

Bhopal / Madhya_Pradesh      Jun 14 ,2019 07:48