अब भी दबी है कागजों में गड़बड़ियां, अब भी नप सकते है वन विभाग कई अधिकारी / Madhya_Pradesh

अब भी दबी है कागजों में गड़बड़ियां, अब भी नप सकते है वन विभाग कई अधिकारी

@lionnews.in

भोपाल। मध्य प्रदेश की पूर्व शिवराज सरकार के समय हुए वन विभाग बड़े घोटाले हुए थें। नर्मदा नदी के किनारों पर लागये गयें नर्मदा यात्रा के दौरान वृक्षों का पौधारापण हों या 2008 में हुई वन रक्षकों की भर्ती। लॉयन न्यूज बात कर रहा हैं 2008 मे हुई वन रक्षकों की भर्ती में हुए घोटाले की। वर्ष 2008 में हुई भर्ती घोटाले की जांच में लोकायुक्त को मामला दियें जाने तक की सिफारिश शिकायत क्रमांक/सावप्रप/शिका/57/2010/78 जांच के प्रतिवेदन पर 1 जून 2010 को की गई थी। यह सभी दस्तावेज लॉयन न्यूज के पास भी उपलब्ध है। लेकिन वन विभाग ने तीन जांचे कराने के बाद भी उसे लोकायुक्त को नहीं सौपा। जबकि इस घोटाले के तार मंत्री के बगले से लेकर आला अधिकारियों चयन प्रक्रिया से जुड़े होने के सबूत दस्तावेजों में दफन है। इस घोटालें में आला अधिकारियों चयन प्रक्रिया में विरोधाभास के कारण ही यह भ्रष्टाचार हुआ था। वन विभाग ने जांच भी ऐसे अधिकारियों से कराई थी। जो आला अधिकारियों के ही अधीनस्थ रहे है। जिसके चलते निष्पक्ष जांच होने की उम्मीद ही नहीं की जा सकती थी। और इन तीनों जांचों को सिर्फ खानापूर्ति कर बंद कर दिया गया।

       मीड़िया रिपोर्ट के अनुसार यदि निष्पक्ष जांच होती हो तत्कालीन शिवराज सरकार के वन मंत्री विजय शाह, तत्कालीन प्रमुख सचिव प्रशांत मेहता, .के. भट्टाचार्य, तत्कालीन पीसीसीएफ पीबी गंगोपाध्याय, तत्कालीन डीएफओ रवींद्र सक्सेना सहित कई अन्य प्रभावशाली अफसरों मिली की पोल खुल जाती। यही वह कारण भी बने जिसके चलते इस जांच को दबा दिया गया।  कमलनाथ सरकार निष्पक्ष होकर इस मामले की जांच कराती है तो वन विभाग के कई अधिकारी नप सकते है।

/ Madhya_Pradesh      May 27 ,2019 03:56