जब प्रज्ञा ठाकुर को नासिक कोर्ट में पेश किया तो क्या बोली थी साध्वी. . . जानियें / Madhya_Pradesh

जब प्रज्ञा ठाकुर को नासिक कोर्ट में पेश किया तो क्या बोली थी साध्वी. . . जानियें

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भोपाल। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने बुधवार को भाजपा की सदस्यता ले ली। कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के खिलाफ अब बीजेपी भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को मैदान में उतार सकती है। 2008 में हुए मालेगांव बम विस्फोट में उन्हें शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया। मालेगांव मैं 2008 में बम विस्फोट हुआ उसमें एक गाड़ी जो उन्होंने एक साल पूर्व बेंच थी पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और गिरफ्तार कर लिया यह पूछताछ चलती रही और अत्याचार बढ़ता रहा मालेगांव बमकांड के संदेह में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नासिक कोर्ट में पेश किया गया। मालेगांव मैं 2008 में बम विस्फोट हुआ उसमें एक गाड़ी जो उन्होंने एक साल पूर्व बेंच थी पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और गिरफ्तार कर लिया यह पूछताछ चलती रही और अत्याचार बढ़ता रहा मालेगांव बमकांड के संदेह में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नासिक कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद वह अलग अलग जेल में रही। दिये गये शपथपत्र दिया जो हूबहू इस प्रकार है।

‘‘14 अक्टूबर को सुबह मुझे कुछ जांच के लिए एटीएस कार्यालय से काफी दूर ले जाया गया जहां से दोपहर में मेरी वापसी हुई। उस दिन मेरी पसरीचा से कोई मुलाकात नहीं हुई। मुझे यह भी पता नहीं था कि वे (पसरीचा) कहां है। 15 अक्टूबर को दोपहर बाद मुझे और पसरीचा को एटीएस के वाहनों में नागपाड़ा स्थित राजदूत होटल ले जाया गया जहां कमरा नंबर 315 और 314 में हमे क्रमशः बंद कर दिया गया। यहां होटल में हमने कोई पैसा जमा नहीं कराया और ही यहां ठहरने के लिए कोई खानापूर्ति की। सारा काम एटीएस के लोगों ने ही किया। मुझे होटल में रखने के बाद एटीएस के लोगों ने मुझे एक मोबाईल फोन दिया। एटीएस ने मुझे इसी फोन से अपने कुछ रिश्तेदारों और शिष्यों (जिसमें मेरी एक महिला शिष्य भी शामिल थी) को फोन करने के लिए कहा और कहा कि मैं फोन करके लोगों को बताऊं कि मैं एक होटल में रूकी हूं और सकुशल हूं. मैंने उनसे पहली बार यह पूछा कि आप मुझसे यह सब क्यों कहलाना चाह रहे हैं। समय आनेपर मैं उस महिला शिष्य का नाम भी सार्वजनिक कर दूंगी.

           एटीएस की इस प्रताड़ना के बाद मेरे पेट और किडनी में दर्द शुरू हो गया। मुझे भूख लगनी बंद हो गयी। मेरी हालत बिगड़ रही थी। होटल राजदूत में लाने के कुछ ही घण्टे बाद मुझे एक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया जिसका नाम सुश्रुसा हास्पिटल था। मुझे आईसीयू में रखा गया। इसके आधे घण्टे के अंदर ही भीमाभाई पसरीचा भी अस्पताल में लाये गये और मेरे लिए जो कुछ जरूरी कागजी कार्यवाही थी वह एटीएस ने भीमाभाई से पूरी करवाई. जैसा कि भीमाभाई ने मुझे बताया कि श्रीमान खानविलकर ने हास्पिटल में पैसे जमा करवाये. इसके बाद पसरीचा को एटीएस वहां से लेकर चली गयी जिसके बाद से मेरा उनसे किसी प्रकार का कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इस अस्पताल में कोई 3-4 दिन मेरा इलाज किया गया। यहां मेरी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था तो मुझे यहां से एक अन्य अस्पताल में ले जाया गया जिसका नाम मुझे याद नहीं है। यह एक ऊंची ईमारत वाला अस्पताल था जहां दो-तीन दिन मेरा ईलाज किया गया। इस दौरान मेरे साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं रखी गयी। ही होटल राजदूत में और ही इन दोनो अस्पतालों में. होटल राजदूत और दोनों अस्पताल में मुझे स्ट्रेचर पर लाया गया, इस दौरान मेरे चेहरे को एक काले कपड़े से ढंककर रखा गया। दूसरे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मुझे फिर एटीएस के आफिस कालाचैकी लाया गया।

        इसके बाद 23-10-2008 को मुझे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के अगले दिन 24-10-2008 को मुझे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक की कोर्ट में प्रस्तुत किया गया जहां मुझे 3-11-2008 तक पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश हुआ। 24 तारीख तक मुझे वकील तो छोड़िये अपने परिवारवालों से भी / Madhya_Pradesh      Apr 18 ,2019 10:24