अभिनयन में हुआ नाटक नन्दू नचैया का प्रदर्शन / Madhya_Pradesh

अभिनयन में हुआ नाटक नन्दू नचैया का प्रदर्शन

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भोपाल| मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नवीन रंगप्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला 'अभिनयन' विजय सोनवने के निर्देशन में नाटक 'नन्दू नचैया' का मंचन संग्रहालय सभागार में हुआ |

मध्यलप्रदेश के बुन्देजलखण्ड  एक निचली जाति जो कि अपनी लोक नाट्य शैली से पहले प्रसिद्ध थी जिसे रवाला कहा जाता है। नन्दू नचैया इसी शैली से प्रभावित है जिसे उसने अपने अन्दार आत्मलसात किया। उसका नाच देखकर लोग बहुत पसंद करते है, उसे अपनी जाति से बड़ी जाति में कला दिखाने का मौका मिलता है। ठाकुर साहब के यहां जब वो अपनी कला दिखाता है तो ठाकुर की बहन (रूपा) को नन्दूऔर उसकी कला से प्रेम हो जाता है। जब यह बात ठाकुर को पता चलती है तो वह अपनी बहन को हवेली से निकाल देता है। रूपा नन्दू  से विवाह कर लेती है जब यह बात शैतान सिंह ठाकुर की हवेली का एक आदमी को पसंद नहीं आती क्योंैकि वह रूपा से शादी करना चाहता था। इसलिए वह नन्दूी को मार देता है। रूपा अपने पेट में पलने वाले नन्दू  के बच्चेर को एक बड़ा कलाकार बनाने का संदेश देती है।

नाट्य प्रस्तुति के दौरान मंच पर विजय सोनवने (नन्दू नचैया), जूली प्रिया (रूपा), रोहित कुशवाहा (शैतान सिंह), राजेन्द्रप सोनी ( ठाकुर साहब), अभिलाषा (ठकुराईन), गुंजन लोधी (सखी), अंजलि जैन, वेद यादव, नरेन्द्र  सराठे,विवरान्त् चौथी, ऋषभ मरावी और बलराम ओझा आदि कलाकारों ने मंच पर अपने अभिनय कौशल से सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दियाप्रस्तुति के दौरान नाटक का कथासार एवं संगीत में मयंक तिवारी/विनीता दौरे,ढोलक पर महेन्द्र , ताशा/ढपली पर धर्मेन्द्रे। विजय सोनवने कई वर्षों से रंग कर्म के क्षेत्र से जुड़े हैं| विजय सोनवने ने कई नाटकों में अभिनय करने के साथ ही साथ कई नाटकों का निर्देशन भी किया है| प्रस्तुति के दौरान कई बार दर्शकों ने कालतल ध्वनि से कलाकारों का उत्साह वर्धन किया|

/ Madhya_Pradesh      Mar 29 ,2019 15:22