भोपाल एम्स: OPD की संख्या में  इजाफा, लेकिन कम मैनपावर की समस्या बड़ी / Madhya_Pradesh

भोपाल एम्स: OPD की संख्या में इजाफा, लेकिन कम मैनपावर की समस्या बड़ी

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भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल जहा अच्छे इलाज और कम कीमत में सर्जरी के लिये अपनी पहचान बना रहा है। वहीं दुसरी ओर संस्थान कम मैनपावर की समस्या से जूझ रहा है। एम्स भोपाल ने शुक्रवार को पत्रकारवार्ता कर अपने सात माह में हुए कार्यो भविष्य में किये जानेवाले कार्यों की जानकारी दी। भोपाल एम्स में पिछले सात माह में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ हैं। एम्स भोपाल के निदेशक प्रोफेसर सरमन सिंह ने बताया है कि पिछले जून में जहा ओपीड़ी छत्तीस हजार पांच सौ तक पहुची थी तो वहीं यह आकड़ा अब छयालिस हजार को भी पार कर रहा है। उन्होंने सर्जरी में भी जून की अपेक्षा दिसम्बर में अधिक होना बताया है। सरमन कहते हैं कि एम्स भोपाल में मेनपावर की कमी है। फिर भी हम अच्छा काम कर रहे है। 

        उन्होंने एम्स भोपाल में हो रहे शोध कार्यो को संस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि हमे खुशी है कि एम्स भोपाल में 17 पीएचडी छात्रों ने प्रवेश लिया है। जो टीवी की बिमारी पर सबसे अच्छा शोध करने जा रहे है। प्रोफेसर सरमन शुक्रवार को पत्रकारवार्ता में भविष्य में किये जाने वाले कार्य सात माह की उपलब्धी की जानकारी दे रहे थें। सरमन सिंह ने उपलब्ध संसाधनों के साथ इस संस्थान के राष्ट्रीय महत्व को अपनी ऊँचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए कहा कि उनके एम्स भोपाल का कार्य सम्भालने के बाद से अच्छा काम हुआ है। पहले की अपेक्षा अब यहा लगातार मरीजों की संख्या तेजी से बड़़ी है। इसके पीछे हमारे द्वारा दी जा रही मरीजों को सुविधा है। एम्स भोपाल के मरीजों को बड़ी सुविधा देने जा रहे है। एम्स भोपाल ज्लद ही चार एंबुलेंस, इनमें से दो एंबुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली होंगी। जिसमें जीवन की रक्षा के लियें हर उपकरण होगा।

उन्होंने बताया कि एम्स भोपाल पहले ही 24 घंटे इमरजेंसी सेवा शुरू कर चुका है। यहा 574 बिस्तर का अस्पताल है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ग्रामीण स्वास्थ कों ध्यान में रखते हुए एम्स भोपाल को चिकलोद में 10 एकड़ जमीन दी हैं। जिसमें काम शुरू होने जा रहा है। सरमन कहते है कि पिछले सात माह में मेजर और माइनर सर्जरी में लगातार इजाफा हुआ है। उन्होंने यह एपीलेप्सी में दो सर्जरी की सफलता की बात भी बताई। यूनिक टेकनोलाजी का इस्तेमाल किया है। तमाम उपलब्धियों के बाद भी एम्स भोपाल कम मैनपावर की बड़ी समस्या का सामना कर रहा है। निदेशक कहते है कि ज्लद ही भर्ती प्रक्रिया की जाएगी। लेकिन तय समय की जानकारी नहीं देते। 

इस अवसर पर उप निदेशक (प्रशासन) संतोष सोहगौरा ने वर्ष 2018 में लिए गए संकल्पों पर जोर देते हुए बताया कि हमने अच्छा काम किया है। आज भोपाल एम्स की सफलता चर्चा पूरे देश में है।

/ Madhya_Pradesh      Jan 04 ,2019 17:22