हैंड पंप मेकेनिक से परेशान सीहोर पीएचई दफतर, कार्यपालन यंत्री को लिया ठेंगे पर / Madhya_Pradesh

हैंड पंप मेकेनिक से परेशान सीहोर पीएचई दफतर, कार्यपालन यंत्री को लिया ठेंगे पर

@lionnews.in

KK Tripathi, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का पीएचई दफतर इन दिनों अपने ही विभाग और अपने साथ काम कर रहे हैंड पंप मेकेनिक आरएन खरे से परेशान है। पद हैंड पंप मेकेनिक का है लेकिन खरे कई सालों से स्थापना का काम देख रहे हैं। जबकि दफतर में पहले से चार बाबू स्थापना में पहले से है फिर भी खरे को बड़ा बाबू बना दिया गया है। मामला खरे द्वारा हर काम के लिये आर्थिक लाभ कमाने का है। दो माह पूर्व स्थाई कर्मि शफिक खॉ की मौत समय पर वेतन नहीं मिलने के चलते हो गई। उसकी मौत से दो दिन पहले ही उसको वेतन दिया गया। जिसके चलते समय पर वह अपना इलाज नहीं करा सका। इतना होने के बाद भी मरहूम शफिक की मौत का आज 50 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है। परिवार को आज दिनांक तक काई भूगतान नहीं हुआ। शफिक के बेटे कलीम खॉ ने इसकी शिकायत एसके जैन कार्यपालन यंत्री से की। कार्यपालन यंत्री के मोखिक आदेश को बडे़ बाबू ने ठेंगे पर रख दिया। साहब की बात को भी खरे ने उनकी बात को हवा में उड़ा दिया।

    इतना ही नहीं चार दर्जन कर्मचारियों का सातवें वेतन का एरियल खरे ने सिर्फ इस लिये नहीं होने दिया क्योंकि कर्मचारियों ने उसको उसकी मंशा के अनुसार आर्थिक लाभ देने से मना कर दिया। अब आलम यह है कि जिन्होनें खरे भोपाल के पर्यावास भवन में स्थित कोषालय में बैठे बाबू को रिश्वत लेने के नाम पर बदनाम करते हुए की जैब भरने में लगा है और जो खरे बाबू की जैब भरेगा उनका एरियल होगा और जिन्होनें खरे की नहीं सुनी वो अब भी वहानों के सहारे उम्मीद लगाये हुए है।

दरअसल खरे का पद हैंड पंप मेकेनिक का हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से खरेे मेकेनिक का काम छोड़ कर स्थापना का काम संम्भाल रहे है। इतना ही नहीं सीहोर जिले के दफतर में सब इनको बड़े बाबू के नाम से जानते है। खरे का डर इतना है कि उनके पीठ पीछे उनके कारनामों की शिकायत कलेक्टर सीहोर को करने की बात सामने आई है। ऐसी ही एक शिकायत भोपाल के पर्यावास भवन में स्थित कोषालय, पीएचई मुख्यालय भोपाल की गई हैं। सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार दो माह पूर्व खरे की शिकायत विभागीय मुख्यालय भोपाल बाड़गंगा में भी मौखिक रूप से की गई थी। इसके बाद कार्यालय भोपाल ने एसके जैन कार्यपालन यंत्री सीहोर को खरे के कारनामों की जानकारी दी। इसके बाद भी खरे में कोई बदलाव नहीं आया। इसके पीछे सूत्र कहते है कि खरे अपने परिवार का राजनेतिक संबंध बड़े नेता से होने की बात करता है। जिसके चलते अधिकारी भी डरे रहते है। तो एक सूत्र का कहना है कि खरे की कमाई में बंदरबाट है। खरे कमाई का एक हिस्सा साहब को भी देता है। जिसके चलते वह बाहूबली बना हुआ है।                         लेकिन अब खरे बाबू की शिकायत कलेक्टर सीहोर से की जा रही है। देखना होगा कि खरे से दफतर में काम कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलेगी या फिर …!

/ Madhya_Pradesh      Oct 31 ,2018 17:12