अधीक्षिका ने करतूत छिपाने रचा प्रपंच, स्थानीय नेताओं को पर्दे के पीछे का संरक्षण / Madhya_Pradesh

अधीक्षिका ने करतूत छिपाने रचा प्रपंच, स्थानीय नेताओं को पर्दे के पीछे का संरक्षण

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शहडोल जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को आदर्श आवाशीय विद्यालय भेजा वो यह सोच रहे थे कि इस छात्रावास में रहने के साथ-साथ पढ़ाई की पूरी व्यवस्था हो पायेगी। शासन की मंशा तो कुछ ऐसी ही थी पर बारी ही खेत खा रही है यह किसी सोचा भी नहीं था। ऐसा ही कुछ जिले के आवासीय छात्रावासों में हो रहा है जहां बच्चों के नाम पर खेल खेला जा रहा है।
जयसिंहनगर विकास खण्ड शिक्षा के नाम पर अखाड़ा बनता जा रहा है, यहां जातीय राजनीति के साथ-साथ व्यक्तिगत खेल भी खेला जा रहा है। पूरे विकास खण्ड में विद्यालय एवं छात्रावासों में जो मनमानी का दौर शुरू है उस पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है और यह पूरा का पूरा $कारनामा सहायक आयुक्त के द्वारा रचा गया है तथा सहायक आयुक्त कार्यालय के नाम पर नरोत्तम वरकड़े अपनी दुकान चला रहे हैं। जहां कलेक्टर को नजर अंदाज कर सहायक आयुक्त ने शिक्षक, अधीक्षक एवं प्राचार्यों के लिये रेट निर्धारित कर पदस्थापनाओं की दुकान खोल दी है। जिसका खामियाजा गत दिवस जयसिंहनगर में बच्चों को भोगना पड़ा। 
आदर्श आवासीय विद्यालय जयसिंहनगर के कन्या छात्रावास में विगत दिवस जो घटना घटी वह शर्मशार करने वाली थी। शिक्षा के मंदिर में और खुद शिक्षक जूतम पैजार पर आमादा हो जाये तो फिर बाकी का क्या बचा। अपने ही वरिष्ठ अधिकारी पर अधीक्षिका ने मारपीटकर घृणित आरोप लगाते हुये मामले को तूल दे दिया, जबकि प्राचार्य को विद्यालय के साथ-साथ उसके अधीनस्थ चल रहे कन्या एवं बालक छात्रावास के निरीक्षण करने का अधिकारी शासन ने निहित किया है। 
विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी के नाक के नीचे इतनी बड़ी घटना घटी और उक्त अधिकारी ने घटना की हकीकत तक जाना भी उचित नहीं समझा, जबकि यह आदर्श आवासीय विद्यालय की भी जिम्मेदारी विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी की ही है। लेकिन पर्दे के पीछे जो राजनीति चल रही है उस पर अब तक विकास खण्ड अधिकारी का मौन भी सवालों के कटघरे में आता है। 
जानकारों की अगर मानें तो अधीक्षिका निर्मला सिंह ने जयसिंहनगर थाने में बच्चों की अश्लील फोटो खींचने का आरोप प्राचार्य आर.बी.साकेत पर लगाया है। अगर श्री साकेत ने बच्चों की अश्लील फोटो कन्या छात्रावास में खींची है तो पुलिस इस मामले में मौन क्यों है। अब तक मोबाईल जप्तकर अश्लील फोटो क्यों पुलिस ने अपने कब्जे में नहीं लिया। 
जयसिंहनगर के कुछ लोग इस मामले में राजनीति को कर रही रहे हैं, तथा बच्चों के नाम पर होने वाली इस राजनीति में घिनौने कृत्य भी सामने आ रहे हैं। रविवार को जो मीनू था। अगर उसके मुताबिक खाना बना है तो अधीक्षिका ने तत्काल अपनी बात क्यों नहीं रखी तथा अब बच्चों के नाम पर या यंू कहें कि बच्चों के कंघे पर बंदूक  रखकर जो काम अधीक्षिका और स्थानीय तथा कथित लोग कर रहे हैं वह कहां तक जायज है। 
अधीक्षिका निर्मला सिंह की नियुक्ति को लेकर जयसिंहनगर क्षेत्र की विधायक जिन्हें इस क्षेत्र में आदिवासियों के हक का दूत भी कहा जाता है, उन्होने उक्त शिक्षिका की नियुक्ति करवाई थी और उसने विद्यालय में बच्चों के पेट काटने का काम शुरू किया था ऐसे में क्या विधायक को आगामी विधानसभा चुनाव में लाभ मिलेगा। 
जानकारों की अगर मानें तो छात्रावास की छात्राओं को आज विद्यालय नहीं भेजा गया। इसके पीछे अधीक्षिका की मंशा क्या थी, वहीं बगल में बालक आवासीय विद्यालय के छात्रों को भी छात्रावास से विद्यालय नहीं जाने दिया गया। ऐसे में तो पूरे जिले में छात्रावास के अधीक्षकों को बांह चढ़ाने का अवसर मिल जायेगा और निरीक्षण में गये अधिकारियों को किसी भी घिनौने आरोप से घेरा जा सकेगा। 
सहायक आयुक्त कार्यालय से मंडल संयोजक को जांच के लिये जयसिंहनगर भेजा गया था, किन-किन मुद्दों पर उन्होने जांच की, क्या-क्या तथ्य सामने आये, क्या बच्चियों को बली का बकरा बनाया गया जैसे सवाल अभी भी अनुउत्तरित हैं।
प्रमुख सचिव ने दिये जांच के निर्देश 
सहायक आयुक्त कार्यालय से यह पता चला है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुये प्रमुख सचिव एस.एन.मिश्रा ने भी जांच के निर्देश जारी किये हैं तथा हकीकत को सामने लाने के निर्देश भी दिये हैं।

 
/ Madhya_Pradesh      Oct 02 ,2018 17:20