मप्र की राजनीति और विपक्ष का गठबंधन Bhopal / Madhya_Pradesh

मप्र की राजनीति और विपक्ष का गठबंधन

सचिन गंगराड़े, भोपाल। 

देश मे इस समय विपक्ष के तमाम बड़े नेता केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए  आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा विरोधी पार्टियों के गठबंधन के लिए जोर दे रहे है। इसकी शुरुआत कर्नाटक के विधानसभा एवं उत्तरप्रदेश के लोकसभा उपचुनावों से हो भी चुकी है। अब बारी आगामी तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों की है। मप्र में भी आसन्न विधानसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष के गठबंधन की वकालत की जा रही है। विपक्षी एकता को परवान चढ़ाने के लिए प्रदेश के छोटे दलों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक जनता दल के अध्यक्ष एवं समाजवादी नेता शरद यादव विगत दिनों खासी मसक्कत करते भी नजर आए है। 

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए वैसे तो शरद यादव के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव दिल्ली के मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के दौरे भी प्रदेश में हो चुके है, लेकिन उनका झुकाव गठबंधन से ज्यादा अपना जनाधार बढ़ाने की और ही रहा था। शरद यादव ही अपने दौरे में विपक्षी एकता की बात करते नजर आए ,लेकिन फिलहाल तो यादव प्रदेश के केवल छोटे दलों के साथ ही कदमताल कर पा रहे है। वे मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एवं बसपा को इस बाबत अभी तक पूरी तरह तैयार नही कर पाए है। प्रदेश के छोटे दल तो शरद यादव के बहाने चुनाव के लिए बनने वाले विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनने को बहुत ही आतुर दिख रहे है, लेकिन इन दलों को गठबंधन में शामिल करने की मंशा कांग्रेस की ओर से फिलहाल तो दिख नहीं रही है।     

प्रदेश के सभी विपक्षी दलों के गठबंधन की धुरी बनने को आतुर शरद यादव और कांग्रेस का याराना कभी नहीं रहा है। लगभग दो दशकों तक एनडीए के साथ रहकर कांग्रेस को जमकर कोसने वाले शरद यादव अब कांग्रेस का साथ लेने को मचल रहे है वे कांग्रेस के पक्ष में बयान देने से भी पीछे नहीं हट रहे , तो वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को लोकतंत्र के लिये सबसे बड़ा खतरा बता रहे है। वे मोदी हटाओं संविधान बचाओ जैसे नारे तक लगा रहे है। वैसे भी गठबंधन के इस दौर में  नेताओं उनकी पार्टियों की विचारधारा के साथ चलने की परंपरा दो दशक पहले समाप्त हो चुकी है। इस दौर में सत्ता एवं निजी स्वार्थ के लिए पार्टीयों का  ऐसा घालमेल हुआ है कि विपरीत विचारधारा वाली पार्टियां भी सरकार बनाने में संकोच नहीं कर रही है। इन पार्टी नेताओं के मन भले ही मिले लेकिन सत्ता की मजबूरी उन्हें एक साथ जरूर बांध रही है। 

Bhopal / Madhya_Pradesh      Sep 07 ,2018 16:23