प्रदेश सरकार पर मडरा रहे 3,000 करोड़ के घोटाले के बादल / Madhya_Pradesh

प्रदेश सरकार पर मडरा रहे 3,000 करोड़ के घोटाले के बादल

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भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश सरकार पर एक और घोटाले का आरोप लगा है। लगातार आ रही मीडिया रिपोर्ट की माने तो प्रदेश का ई-टेंडर घोटाला बीजेपी सरकार के लिये काले घने बादल है। जो चुनाव से पहले शिवराज सरकार पर मडरा रहे हैं। 

व्यापम घोटाले के बाद ये अब तक का दुसरा बड़ा घोटाला होगा जो अब सामने आने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में सैकड़ों करोड़ रुपये का ‘ई-टेंडर में हेरा-फेरी हुई है। अॉनलाइन खरीद प्लेटफॉर्म पर व्यापक पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आई है। साइबर सेंधमारी के जरिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही सरकारी ठेका मिलने की बात सामने आई है।

इस घोटाले का सबसे बड़ा उदाहरण है कि मध्य प्रदेश जल निगम ने मार्च में तीन कांट्रैक्ट के लिए निविदा आमंत्रित किया था। इसके लिए आवेदन देने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जल निगम को एनक्रिप्टेड ई-डॉक्यूमेंट मिले थे। निगम ने पाया था कि कुछ लोग निजी कंपनियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ साठगांठ कर एनक्रिप्टेड डॉक्यूमेंट में बदलाव किए हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद निगम के संबंधित अधिकारियों ने विभाग को इस बाबत सतर्क किया था। रिपोर्ट की मानें तो एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भी बोली प्रक्रिया में घालमेल की शिकायत की थी। कंस्ट्रक्शन के अलावा इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सक्रिय यह कंपनी बेहद कम मार्जिन से कांट्रैक्ट हासिल करने में विफल रही थी। एक मीडिया हाउस के दैनिक पेपर की रिपोर्ट के अनुसार, इसके जरिये तकरीबन 3,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। 

सुरक्षित ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म में सेंधमारी की बात सामने आने के बाद जल निगम ने नोडल डिपार्टमेंट स्‍टेट इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) से मदद मांगी थी। MPSEDC ही ई-टेंडर से जुड़ी वेबसाइट को ऑपरेट करता है। जल निगम ने विभाग से पूछा था क‍ि ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म के सुरक्षित होने के बावजूद इसके साथ छेड़छाड़ कैसे की गई? इसके बाद MPSEDC के प्रबंध निदेशक (MD) मनीष रस्‍तोगी ने आंतरिक जांच करवाई थी। इसमें राजगढ़ और सतना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की बात सामने आई थी। ई-डॉक्‍यूमेंट में हेरफेर के कारण जल निगम का दो ठेका हैदराबाद और एक मुंबई की कंपनी के हाथ लगी थी। आंतरिक जांच में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलिभगत की बात भी सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जल निगम के तीनों ठेके 2,322 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के थे। जल निगम के तीन कांट्रैक्‍ट के अलावा छह और कांट्रैक्‍ट में ई-डॉक्‍यूमेंट के साथ हेरफेर की बात सामने आई। सेंधमारों ने लोक निर्माण, जल संसाधन, सड़क विकास निगम, और परियोजना क्रियान्‍वयन विभाग की ओर से जारी ठेकों में भी इसी तरह से सेंध लगाई है। MPSEDC ने इस मामले में TCS और एंटेरिज सिस्‍टम को 6 जून को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इन दोनों कंपनियों पर ई-टेंडर से जुड़ी वेबसाइट के रखरखाव और स्‍टॉफ के प्रशिक्षण की जिम्‍मेदारी है। दोनों कंपनियों ने अपने जवाब में साइबर फ्रॉड की बात से इनकार नहीं किया, लेकिन इसकी जिम्‍मेदारी भी नहीं ली।

/ Madhya_Pradesh      Sep 06 ,2018 16:48