चुनावी सरगर्मियां तेज,  नीतीश, केजरी एवं अखिलेश तलाशेंगे जमीन / Madhya_Pradesh

चुनावी सरगर्मियां तेज, नीतीश, केजरी एवं अखिलेश तलाशेंगे जमीन

जुलाई माह में सियासी जमीन तलाशेंगे नीतीश केजरी एवं अखिलेश यादव

सचिन गंगराड़े। मध्यप्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई है। समीकरणों को अपने पाले में करने के लिए सत्ताधारी भाजपा मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की जोरआजमाईस जोरो पर है, वही अब प्रदेश में अपनी सियासी जमीन तलाशने मौजूदा जुलाई में बिहार के मुख्यमंत्री एवं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, आप के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं सपा प्रमुख एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मप्र रहे है।

        बिहार में भाजपा के सहयोग से सत्ता चला रही जेडीयू के सभी 230 सीटों पर लड़ने के  एलान के बाद नीतीश का कार्यक्रम बनाया जा रहा है। जेडीयू की ओर से बुन्देलखण्ड एवं महाकौशल पर विशेष फोकस की बात कही जा रही है समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव एवं आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पूर्व में ही सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने का एलान कर चुके है। सपा की  से सभी 51 जिलों में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए गए है ,वही आप ने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का सिलसिला शुरू कर दिया है।अखिलेश दौरे के दौरान भोपाल में एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इंदौर में कार्यकर्ताओं की बैठक में चुनाव अभियान का आगाज कर सकते है।

मप्र के लोक सभा चुनाव में आप से ज्यादा मत नोटा को

अन्ना आंदोलन के बाद बनी आम आदमी पार्टी को दिल्ली को छोड़कर अन्य प्रदेशों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। मध्यप्रदेश में 2014 के लोकसभा चुनाव में  पार्टी ने सभी 29 सीटों पर हाथ आजमाया था,  जिसमे उसे महज1.18 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे, जो नोटा को मिले 2 फीसदी से भी कम थे। गुजरात एवं कर्नाटक के विधानसभा चुनावो में भी आम आदमी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। आप ने गुजरात मे 33 कैंडिडेट्स चुनाव मैदान में उतारे थे, लेकिन सभी की जमानत जब्त हो गई थी। उसके 16 कैंडिडेट्स को तो 500 से भी कम वोट मिले। उधर, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में में 29 उम्मीदवार उतारकर आप ने दक्षिण में पैर जमाने की कोशिश की लेकिन यहां भी निराशा ही हाथ लगी थी। पार्टी के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। कर्नाटक विधानसभा के आए नतीजों में आप का एक भी उम्मीदवार तीन हजार मत हासिल करने में सफल नहीं हुआ था।

 जेडीयू का नही रहा आधार

विगत दो दशकों से भाजपा की सहयोगी रही जेडीयू का मप्र में जमीनी आधार नही रहा है। 2008 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के 49 में से 48 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी और यही स्थिति 2013 में भी बनी थी जब पार्टी 22 में से सिर्फ 1 उम्मीदवार अपनी जमानत बचा पाया था।

 विगत दो चुनावो में सपा का रहा सूपड़ा साफ

2003 के मप्र विधानसभा चुनाव में  सपा को 7 सीटों के साथ 5 फीसदी मत प्राप्त हुए थे, जबकि विगत दो चुनावो में पार्टी का लगभग सूपड़ा साफ होता रहा है। 2008 के चुनाव में 187 सीट में से 2 फीसदी मतों के साथ पार्टी को केवल एक सीट प्राप्त हुई थी, वही 2013 में पार्टी का आंकड़ा शून्य ही रहा ये परिणाम तब है , जब पार्टी यूपी में सत्ता पर काबिज थी तथा मप्र के विंध्य एवं बुंदेलखंड में उसका जनाधार माना जाता है।

/ Madhya_Pradesh      Jul 10 ,2018 08:56