मप्र में बदले समीकरण इसलिए बसपा के भी जागे अरमान Bhopal / Madhya_Pradesh

मप्र में बदले समीकरण इसलिए बसपा के भी जागे अरमान

 
 
@lionnews.in
सचिन गंगराड़े ,
भोपाल। उत्तर प्रदेश में विगत माह हुए लोकसभा उपचुनावों में भाजपा को हराने के लिए बसपा ने लगभग ढाई दशक पुरानी दुश्मनी भुलाकर बिना कोई कठिन शर्त के सपा से हाथ मिलाया था, लेकिन मप्र में कांग्रेस से गठबंधन को लेकर उसके तेवर बदलें हुए है। इसका कारण प्रदेश सरकार के खिलाफ विगत अप्रेल माह में हुआ दलित आंदोलन है। इस आंदोलन ने बसपा के भी अरमान जगा दिए है। पार्टी की मंशा उत्तरप्रदेश से सटे जिलों में सरकार के खिलाफ दलितों के इस विरोध को मौजूदा चुनाव में पूरी तरह भुनाने की है। उत्तरप्रदेश  की सीमा से सटे होने के कारण प्रदेश के बुंदेलखंड , चम्बल एवं विंध्य क्षेत्र के जिलें बहुजन समाज पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे है। बसपा को भाजपा विरोधी इन वोटों के सहारे इन क्षेत्रों  की लगभग 12 से 15 सीटें जीतने की पूरी उम्मीद लग रही है। चुनाव के बाद यह सीटें सरकार बनाने मे निर्णायक साबित हो सकती है। ऐसे में बसपा की मंशा भी अपनी शर्तों पर ही गठबंधन करने की है।
 
 तीसरी ताकत के खड़े होने की भी चिंता
मध्यप्रदेश की राजनीति शुरू से ही कांग्रेस ओर भाजपा के बीच घूमती रही है। प्रदेश का दलित वोट अभी तक इन्ही दोनो दलों तक सीमित रहा है। इसलिए तीसरी पार्टी के रूप में प्रदेश स्तर पर खड़े होने का मौका बसपा को कभी नही मिला है। गठबंधन होने से प्रदेश में तीसरी ताकत के रूप में सपा विशेषकर बहुजन समाज पार्टी के खड़े होने की संभावनाएं बढ़ जाएगी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होने वाला है। इसलिए भी कांग्रेस मध्यप्रदेश में गठबंधन को लेकर फूंक कर ही कदम रख रही है ।
Bhopal / Madhya_Pradesh      Jun 12 ,2018 05:47