शह और मात का खेल अब जोरों पर, एंटी-इनकंबेंसी किसकी? / Madhya_Pradesh

शह और मात का खेल अब जोरों पर, एंटी-इनकंबेंसी किसकी?

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केवल कृष्ण त्रिपाठी,  भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में बदलाव का दौर शुरू हो गया है। अब शतरंज की राजनैतिक बिसात पर शह और मात का खेल जोरों पर है। भारत में कांग्रेस हो या बीजेपी या कोई अन्य दल, इतिहास बताता है कि यहा चौसर की बिसात पर राजनीति हुई है। बड़ी बात यह है कि इस देश में हर दल के अंदर खिलाड़ी मौजूद है। जो अपनों को अपने फायदे के लिये मात देने में पीछे नहीं हटते। इस खेल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चैम्पियन है। पूरे प्रदेश में जब सरकार के प्रति जनता की एंटी-इनकंबेंसी बड़ी है तब शातिर खिलाड़ी की तरह संगठन में अपने हिसाब से परिवर्तन करा कर तोप का मुह मोड़ दिया। जबकि संगठन के अंदर व्याप्त एंटी-इनकंबेंसी सरकार के क्रियाकलापों को लेकर थी। फिर चेहरा सरकार के मुखिया का बदलना चाहिये था लेकिन बदला गया भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का। याने शिवराज एक पेशेवर खिलाड़ी की तरह अपने हिसाब से मोहरों का उपयोग करते हुए अपने आपको बचा लिया। 

वहीं भाजपा में ऐसा पहली बार होगा जब भारतीय जनता पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष अमित शाह मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष का तिलक करने राजधानी आ रहे है। जंबूरी मैदान के मंच से सीधा संदेश संगठन में जायेगा कि नया प्रदेशाध्यक्ष शाह की पसंद है। अब सवाल सीधा अमित शाह से है कि वह बताये भाजपा का कार्यकर्ता संगठन का विरोधी है या एंटी-इनकंबेंसी किसकी होती है। सरकार की या संगठन की। यदी अपना आदमी ही प्रदेश में बिठाना था तो फिर इसके मायने क्या है ? 

/ Madhya_Pradesh      May 03 ,2018 16:01