इसकी चपेट में आने से हुई  2 साल में 4 बाघ और 3 तेंदुए की मौत / Madhya_Pradesh

इसकी चपेट में आने से हुई 2 साल में 4 बाघ और 3 तेंदुए की मौत

लॉयन न्यूुज, ब्यूरो, सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिलें से लगें जंगल में पिछले दो साल में चार बाघ और तीन तेंदुए की मौत हो चुकी हैै। ताजा जानकारी के अनुसार यह सभी मौत का कारण वन विभाग ट्रेन की चपेट में आने बता रहा है। 

भोपाल-इटारसी रेल खंड पर ट्रेनों की चपेट में जंगली जानवरों का आना कोई नई बात नही है। वन्य प्राणियों की मौत होना भी कोई नई बात नही है। बावजूद इसके, इनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग ने कोई उपाय नहीं किए हैं। ताजा मामला बुधवार का है। एक बार फिर मिडघाट चैका सेक्शन पर सुबह 10.30 बजे पेंचवेली ट्रेन की चपेट में आने से एक तेंदुए की मौत हो गई। जैसे ही सूचना वन विभाग को मिली। टीम मौके पर पहुंच गई। तेंदुए का पीएम कर शव का दाह संस्कार कराया गया। अब तक मिडघाट सेक्शन दो सालों में चार बाघ और तीन तेंदुओं की मौत का करण बना है। सभी की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई हैं।

23 फरवरी 2017 को पानी पीने के लिए गडरिया नाले पर एक बाघ आया था। यहां उसकी मौत हो गई। 5 मार्च 2017 को एक बाघ ट्रेन से टकरा गया और उसकी मौत हो गई। 31 मार्च 2017 को रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से एक बाघिन की मौत हो गई। जनवरी 2017 में बिलकिसगंज के पास नाले में गिरने से एक तेंदुए की मौत हो गई थी। यह तेंदुआ भी पानी की तलाश में ही वहां आया था। अप्रैल 2017 में एक तेंदुए का शव मिडघाट पर मिला था। 22 नवंबर को भी एक तेंदुए की मौत ट्रेन से टकराने से हुई थी। 

बुधवार को रेलवे ट्रैक के खंभा नंबर 780-46 के पास तेंदुआ ट्रेन से टकरा गया। जानकारी के अनुसार ट्रेन क्रमांक 59386 छिंदवाड़ा-इंदौर पेंचवेली फास्ट पैसेंजर के ड्रायवर ने वाकी टाकी से इसकी सूचना केबिन मैन को दी थी। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय वन अमला मौके पर पहुंच गया। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए के शव का पीएम कराया गया। रेंजर एएस खरे ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय वन अमला मौके पर पहुंच गया था। तेंदुए के शव का पीएम किया गया। बुधवार को पटरी पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से तेंदुए की मौत हुई थी। 

/ Madhya_Pradesh      Apr 05 ,2018 04:48