मैक्सिलोफेसियल सर्जरी से चहरे को मिलती है नई पहचान, देश में है विशेषज्ञयों की कमी / Madhya_Pradesh

मैक्सिलोफेसियल सर्जरी से चहरे को मिलती है नई पहचान, देश में है विशेषज्ञयों की कमी

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भोपाल। दुर्घटना में अपने चहरे की मुल पहचान खो चुके लोगों को या जन्म से सांस लेने में बच्चों को होने वाली परेशानी का इलाज मैक्सिलोफेसियल सर्जरी में संभव है। देश में ऐसे विशेषज्ञयों की भारी कमी है। एसोसिएशन आॅफ ओरल एंड मैक्सिलोफेसियल सर्जरी आॅफ इंड़िया ने निशुल्क इलाज दिया है। संस्था हर साल देश में मैक्सिलोफेसियल सर्जरी के कई विशेषज्ञयों को तैयारी कर रही है। फिर भी मैक्सिलोफेसियल सर्जरी के विशेषज्ञों की मांग देश के हर शहर में है। भोपाल में ही हर दिन इस सर्जरी के मरीजों की संख्या हजारों में है। डाक्टर साजिद ने यह जानकारी मध्यप्रदेश की राजधानी में भोपाल एम्स के सभागार में एसोसिएशन आॅफ ओरल एंड मैक्सिलोफेसियल सर्जरी आॅफ इंड़िया ने अंतराष्ट्रीय मैक्सिलोफेसियल सर्जरी डे 2018 का कार्यशाला में दी। इस आयोजन में एसोसिएशन के अध्यक्ष फिलीप मैथ्यू बताते है कि दुर्घटना में अपना मुुल पहचान खो चूके तमाम ऐसे मरीजों को मैक्सिलोफेसियल सर्जरी से उनकी असली पहचान देने में कामयाबी मिली है। कटे ओठों में यह सर्जरी काफी सफल हुई है।  

              एओएमएसआई से अपना अनुभव बताते हुए प्रीतम सेठी कहते है कि पांच हजार पांच सौ सदस्यों की यह संस्था देश में हर साल हजारों मैक्सिलोफेसियल सर्जरी की मरीजों का इलाज निशुल्क कर रही है। जिस सर्जरी का खर्च आज 50 हजार से भी ज्यादा है। उसे हम निशुल्क करा रहे है। सेठी कहते है संस्था हर साल हजारों विशेषज्ञयों को तैयार कर रही है। उनकी केन्द्रों में एक साल के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए फेलाशिप भी दी जा रही है। भारत सरकार देश के हाईवे पर ट्रामासेन्टर खोलने की तैसारी में है जिसमें इन विशेषज्ञयों की आवश्यकता भविषय में होगी। जिसके चलते इन्हें तैयारी किया जा रहा है। 13 फरवरी को अंतराष्ट्रीय मैक्सिलोफेसियल सर्जरी डे के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर भोपाल सांसद आलोक संजर सहित डॉ. एमएस नागरकर, भोपाल और रायसेन एम्स के डारेक्टर, संतोष सोहगौरा उपनिदेशक प्रशासन एम्स उपस्थित रहे।

/ Madhya_Pradesh      Feb 13 ,2018 18:30