“मेला बियाव का” मंचन  मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में / Madhya_Pradesh

“मेला बियाव का” मंचन मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में

भोपाल । मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में सुश्रुत गुप्ता द्वारा निर्देशित नाटक “मेला बियाव का” मंचन संग्रहालय सभागार में “चिल्ड्रन्स थियेटर अकादमी” के कलाकारों द्वारा किया गया। लगभग 1 घंटा 25 मिनट की अवधि में सुश्रुत गुप्ता (भोपाल) द्वारा लिखित नाटक मध्यप्रदेश की एक जनजातीय प्रथा को आधार मान कर तैयार किया गया जो समाज में व्याप्त कुप्रथाओं पर सीधा कटाक्ष करता है|

 कहानी एक गाँव की है जिसकी ये प्रथा है की विवाह करने के लिए लड़के को लड़की को भगा कर ले जाना होता है मंच पर गांव का दृश्य चौपाल लगी है और कुछ लोग बैठ कर गा-बजा रहें है। नाटक की मूल पृष्ठभूमि एक मेले के इर्दगिर्द घूमती है| मंच पर सूत्रधार का प्रवेश और वो कहानी सुनाना शुरू करता है। किस्सा एक अनजान नगर का है जहाँ का सरपंच है “पंचा”, वह पिछले इकहत्तर वर्ष से सरपंच है| गाँव में मेले की तैयारी की जा रही है, उस मेले में नव युवक–युवतियां भाग लेते हैं। नाटक का नायक “भागल”, “फगुनिया” से प्रेम करता है और शादी करना चाहता है। यह बात फगुनिया का भाई बैढंगा जान जाता है और भागल के विरोध में खड़ा हो जाता है| सरपंच फगुनिया के भाई का साथ देता है क्योंकि गाँव के दो लोग अगर अपनी सहमति से विवाह करेंगे तो उसकी सरपंची खतरे में पड़ जाएगी| वे दोनों “ठिठर” नाम का दूसरा युवक को “फगुनिया” को भगाने के लिए खड़ा कर देते है| भागल और ठिठर के बीच गुत्थमगुत्थी होती है, ये बात गांव की पंचायत तक पहुँच जाती है, पंच अपना निर्णय देते हैं, जिससे भागल और ठिठर दोनों अचरज में पड़ जाते हैं| इन्हीं सब उतार चढ़ावों के साथ नाटक चलता है एवं अंत भागल फगुनिया के विवाह के साथ होता है और ठिठर को जो मिलता है उसे देख सभी कहते हैं कि मेले में असल लॉटरी तो ठिठर की लगी है| निर्देशक ने कलाकारों की विभिन्न भूमिकाओं में भागीदारी के साथ इन्ही सब रोचक घटनाओं का खू़बसूरत मंचन दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।
चिल्ड्रन्स थियेटर अकादमी का नामकरण ब.व.कारंत जी के द्वारा किया गया| संस्था द्वारा देश प्रदेश में विभिन्न कार्यशाला का आयोजन एवं नाटकों का मंचन किया जा चुका है। नाटक के निर्देशक कई वर्षों से रंगकर्म के क्षेत्र में सक्रिय रुप से कार्य कर रहे हैं। साथ ही कई नाटकों का लेखन व निर्देशन भी कर चुके हैं। आपने एन.एस.डी. द्वारा आयोजित सिरोंज थियेटर वर्कशॉप में सहायक निर्देशक के रूप में, आज़ाद बांसुरी नाट्य कार्यशाला, सी.टी.ए. बाल नाट्य कार्यशाला में कई नाटकों का निर्देशन किया| आपके द्वारा लिखित नाटकों में खेल के मैदान से, कथा उरैयाबाद की, हम लड़ेंगे, नील विद्रोह आदि शामिल हैं|

 

मंच पर प्रथम भार्गव, युवराज गौरव सक्सेना, अंकित तिवारी, समक्ष जैन, निधि भट्ट, अंकेश शर्मा, भगत सिंह, मेघा, मयंक, निरंजन कार्तिक, पियूष भट्ट, सुभद्रा बिन्धानी, बलदाऊ सोनी, सुनील मीणा, संदीप शाह, हनी भार्गव, निहारिका श्रीवास्तव, वैशाली सेन, नव्य सागर, स्वाति वाणी, इशाक खान, अमृत कौर, शुवराज सक्सेना, विष्णु झा, हर्ष राव आदि कलाकारों ने अभिनय किया |

मंच से परे मंच व्यवस्थापक/निर्माण रत्नेश भार्गव, मंच सहायक प्रमोद मीश्रा, वादन- प्रथम भार्गव, सक्षम जैन, शुवराज सक्सेना, बनमाली बिंधानी, रूप सज्जा रेखा ठाकुर और शालिनी, वस्त्र विन्यास विनीता सक्सेना ने किया|

/ Madhya_Pradesh      Jan 05 ,2018 16:15