कानून-व्यवस्था की समीक्षा बेमानी, मुख्यमंत्री के हाथों आरोपित हो रहे सम्मानित  - केके मिश्रा / Madhya_Pradesh

कानून-व्यवस्था की समीक्षा बेमानी, मुख्यमंत्री के हाथों आरोपित हो रहे सम्मानित - केके मिश्रा

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भोपाल। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा है कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था की समीक्षा करना बेमानी हैं। मंच से मुख्यमंत्री आरोपिय को सम्मानित कर रहे है। मिश्रा ने कुछ फोटों भी बयान के साथ जारी की है।
         मध्यप्रदेश कांगे्रस ने मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने प्रदेश की बिगड़ चुकी कानून-व्यवस्था की समीक्षा को बेमानी करार दिया। मिश्रा ने समीक्षा बैठक को महज औपचारिकता बताया है। राजधानी के पुलिस मुख्यालय में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान द्वारा की गई समीक्षा बैठक पर मिश्रा ने एक बयान जारी कहा है कि गंभीर किस्म के अपराधी मुख्यमंत्री के साथ न केवल मंच साझा कर रहे हैं, बल्कि उनके हाथों सम्मानित भी हो रहे हैं। इस बयान के साथ उन्होनंे कुछ फोटों भी जारी की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को इन तस्वीरो में साफा बादते हुए दिखा जासकता है। 


      श्री मिश्रा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय में संपन्न इस समीक्षा बैठक के 24 घंटे पहले सोमवार को राजधानी भोपाल के ही समन्वय भवन में सहकारिता से जुड़े एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चैहान ने भोपाल के ग्राम-इमलिया में कुछ वर्षों पूर्व प्रेमनारायण मीणा की हत्या के आरोप में आजीवन सजा पाने वाले लालसिंह नामक आरोपित जो दोेे वर्षों तक फरार रहने के बाद तीन सालों तक भोपाल सेन्ट्रल जेल में सजा काट चुके हैं और अभी हाईकोर्ट से जमानत पर हैं, को सम्मानित कर साफा भी पहनाया! मुख्यमंत्री के साथ इसी समन्वय भवन में गत् दिनों व्यापमं महाघोटाले में बड़ा किरदार निभाने वाले उनके सामाजिक रिश्तेदार डॉ. गुलाबसिंह किरार फरारी काटते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने घंटों तक मंच साझा करते रहे। यही नहीं व्यापमं महाघोटाले के ही एक अन्य बड़े किरदार राघवेंद्रसिंह तोमर भी घोटाला उजागर होने के बाद भी मुख्यमंत्री को चार पहिया वाहन में बैठाकर खुद कार चलाते हुए सामने आये, न्यायालय में आरोप स्वीकार करने के बाद भी तोमर को मुख्यमंत्री के निर्देश पर धारा-164 के तहत उसके बयान करवाकर उसे सरकारी गवाह बना दिया गया!
            हालांकि, इन स्पष्ट प्रमाणों के बाद भी मुख्यमंत्री ने व्यापमं महाघोटाले को लेकर मेरे विरूद्व सरकार की ओर से दायर मानहानि प्रकरण में शपथ के साथ दिये गये अपने बयान में जिला न्यायालय के समय डॉ. किरार और तोमर को पहचानने से इंकार कर भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 200 का अपराध किया है, जो मिथ्या साक्ष्य देने का स्पष्ट प्रमाण होकर दंडनीय भी है। यह आरोप मध्यप्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने लगाय है।

/ Madhya_Pradesh      Nov 22 ,2017 13:53