नोटबंदी निगल गई कई लघु उद्योग / delhi

नोटबंदी निगल गई कई लघु उद्योग

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केन्द्र सरकार के तमाम मंत्री इसे कितने भी आकड़ो की बाजीगरी से सफल बताये लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। 10 बाई 10 के कमरो में चलने वाले लघु उद्योग, छोटे कारखाने बड़ी संख्या में बंद हुए है। इनकी तादात लाखों में है। बात करे मुबंई की धारावी की तो यहा तो कई उद्योग नगदी के अभाव से बंद हुए। 8 नवम्बर 2016 की वह रात जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की उसके तीन महिने बाद का मंजर यहा के उद्योग संचालक किसी बड़ी आपदा से कम नहीं मानते।

          नगदी की कमी के चलते मजदूरों का भूगतान नहीं होना और कच्चा माल नहीं मिलना भी एक समस्या रही जिसके चलते उद्योगों को बंद करना मुनासिब समझा गया। यह काम करने वाले राम भरोसे कहते है कि मालिक नोटबंदी के बाद नगद देने में अपने हाथ खीचते थें। और सामान ले जाने का कहते थें। कच्चा या तैयार माल हमारे किसी काम का नहीं था। वहीं तैयार माल कोई इस लिए नहीं उठा रहा था कि भुगतान केसे करें। हमारे देश में छोटे उद्योग कैश में ही लेन देन करते है। कैश की कमी के चलते छोटे धंधें बंद हो गये। इतना ही नहीं। इस नोटबंदी से बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या के रूप में तैयार खड़ी है। देखना होगा कि अब केन्द्र में बैठी मोदी सरकार किस नए लालीपाप के सहारे अगला चुनाव जीतेगी। 

/ delhi      Nov 09 ,2017 05:10