इतिहास दोहराने के मुहाने पर खड़ा मध्यप्रदेश, कोई आग में डाल रहा घी तो कोई पानी / Madhya_Pradesh

इतिहास दोहराने के मुहाने पर खड़ा मध्यप्रदेश, कोई आग में डाल रहा घी तो कोई पानी

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वामन पोट, बैतूल। मध्यप्रदेश में दो दशक पहले जिस तरह किसान आर्थिक बदहाली की कगार पर पहुंच गया था, उससे बदतर हालात इस बार बन गए हैं। सत्ता पर काबिज बीजेपी लोक लुभावन योजनाएं बनाकर किसानों को मदद का ढिंढोरा पीट रही है पर सारी योजनाएं जमीन पर उतरने से पहले ही पूंजीपतियों के खजाने को भर रही हैं। किसानों की समस्या को हल करने की बजाय बीजेपी के नेता खेत खेत घूमकर उनका गुस्सा कम करने का जहाँ दिखावा कर रहे है वहीं अब कांग्रेस किसानों को अपने अधिकार मांगने सड़क पर उतरने के लिए आंदोलित कर रही है। यदि सरकार अभी नही चेती तो बैतूल जिले में मुलताई का इतिहास दोहराया जाए तो कोई संदेह नही होगा। हालात गंभीर है। किसानों को खेतों से बाहर निकलकर सड़क पर लाने की शुरूवात उसी मूलताई से हो गई है जहाँ 1998 में 18 किसानों की शहादत हुई थी। मुलताई तहसील मुख्यालय पर
 सोमवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे ने किसानों के साथ व्यापारियों की समस्या को लेकर आंदोलन की शुरुआत की तो इस आंदोलन में आई भीड़ को लेकर भाजपा सरकार के सत्ता संगठन और संघ के चेहरे पर परेशानिया झलकने लगी है ।अब ये किसान आंदोलन शिवराज सरकार के लिए क्या मुसीबत बनेगा? यह तो 2018 में होने वाले मध्यप्रदेस विधान  चुनाव के नतीजे ही बतायेगे की शिवराज की सरकार फिर परदेस में रहेगी या फिर दिग्विजय की सरकार की तरह गायब हो जाएगी ।1998 में मुलताई में हुए किसान आंदोलन में डॉ सुनीलम के नेतृत्व में   किसानों ने गेरुआ रोग से सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के बाद अपनी मांगों को लेकर  प्रदर्शन किया था और प्रदर्शन हिंसक हो गया था।और पुलिस ने गोलिया बरसा दी थी। तब  शुरुआती खबर आई थी कि छह किसान मारे गए. आठ घायल हुए। इस बीच किसानों और एसपी-कलेक्टर के बीच हिंसक झड़प की खबरें आई, जिसमें कलेक्टर के कपड़े फाड़ दिए गए। किसानों की इन मौतों से 19 साल पहले की ऐसी ही घटना याद आती है। मुलताई गोलीकांड की। जिसे अब भी पूरा देश  याद करते हैं और सिहरते हैं। 12 जनवरी 1998 को मुलताई तहसील के सामने किसानों पर गोली चलाई गई. जिसमें दो दर्जन के लगभग लोग मारे गए थे।
             दिसंबर 1997 और उसके कुछ पहले की बात है। गेरुआ बीमारी का असर फसलों पर पड़ा। रही-सही कसर बेमौसम की ज्यादा बरसात ने निकाल दी थी। ओले भी पड़े थे। सोयाबीन की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी।
            तब किसानों ने कोशिश की कि राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं से मिले। या कोई छोटे नेता ही उन्हें मिलें जिनके जरिये वो अपनी बात ऊपर तक पहुंचा सके। ये सब तो हुआ नहीं हां एक रोज जनता दल का प्रशिक्षण शिविर लेने डॉ. सुनीलम उनके एरिया में आए थे। वहीं मुलताई  के परमंडल गांव के किसान उनसे मिलने जा पहुंचे ।समस्याएं बताई. सुनीलम ने देखा कि सोयाबीन की फसल तो सिरे से खत्म हो गई  है. और किसानों की कोई सुन नहीं रहा. तो उन्होंने क्रिसमस के रोज 25 दिसंबर 1997 से मुलताई तहसील के सामने एक अनिश्चितकालीन धरना देना शुरू किया. इसी के साथ-साथ 400 गांवों का दौरा किया और किसानों और किसान नेताओं को  साथ लाए. एक किसान संघर्ष समिति बनी. सारे नेता जुटे और तय हुआ कि एक महापंचायत बुलाई जाए जहां सारे किसान नेता जुटें. लोगों को लाएं. एक मांगपत्र बनाया जाए और सरकार पर इस चीज का दबाव डाला जाए कि किसानों की बात सुन सके।
              6नवम्बर 2017 सोमवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे  ने अब  किसानों के साथ व्यापारियों की भी  विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया  है और फसल बीमा की राशि देने, मुलताई तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने सहित अन्य मांगों को लेकर भारी भीड़ के साथ मुलताई  के  फव्वारा चैक पर यह धरना प्रदर्शन शुरू कर मिशन 2018 के चुनाव का  बिगुल बजा दिया है ।
            धरना प्रदर्शन में कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे ने कांग्रेसियो को संबोधित करते हुए कहा कि जिले के साथ प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के आकड़े चैकाने वाले हैं। कांग्रेस के शासन में सोयाबीन का मूल्य 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल था। आज स्थिति यह है कि सोयाबीन तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल भी मुश्किल से बिक रही है। किसानों को फसल बीमा के लिए शासन प्रशासन का मुंह ताकना पड़ रहा है। बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। बिजली चोरी के प्रकरण दर्ज कर किसानों को बेइज्जत कर जेल में डाला जा रहा है। श्री पांसे ने आरोप लगाया कि जीएसटी सहित अन्य टैक्सों से व्यापारी परेशान है। बढ़ती मंहगाई ने गरीब मजदूर वर्ग को हलाकान कर दिया है। श्री पांसे ने कहा  मुलताई क्षेत्र के किसानों को फसल बरबाद होने के एवज में फसल बीमा की राशि नहीं दी जा रही है। किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए। सहित अन्य नेताओं ने भी प्रदेश सरकार को किसान विरोधी बताते हुए किसानों की समस्या का समाधान करने की मांग की। धरना स्थल से कांग्रेसि रैली के रूप में ज्ञापन देने तहसील कार्यालय के लिए निकले। नारेबाजी करते हुए कांग्रेसी ताप्ती के पास पहुंचे और सडक पर बैठकर धरना शुरू कर दिया।

कलेक्टर के आश्वासन पर खत्म हुआ धरना 
          पूर्व विधायक ने कलेक्टर शंशाक मिश्र से मोबाइल पर चर्चा कर तहसील क्षेत्र को सूखा ग्रस्त घोषित करने, फसल बीमा की राशि देने, मंडी परिसर में किसानों की फसल की खरीदी करने को लेकर चर्चा की।  कलेक्टर से चर्चा के बाद कांग्रेसियो का धरना प्रदर्शन खत्म हुआ ।

/ Madhya_Pradesh      Nov 07 ,2017 16:09