काफी अंतर है टेलीविजन और ड्रामा की एक्टिंग में, एक्सपर्ट के कमेंट्स / Madhya_Pradesh

काफी अंतर है टेलीविजन और ड्रामा की एक्टिंग में, एक्सपर्ट के कमेंट्स

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भोपाल। शहर के पीएंडटी चौराहे स्थित मायाराम सृजन स्मृति भवन में दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक चल रही पीपल्स थियेटर नाट्य एवं नृत्य कार्यशाला में एक्सपर्ट में अभिनय और नाटक से जुड़ी पहलुओं पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ साहित्यकार और लेखक रवीन्द्र स्वप्नील तिवारी ने वर्कशॉप में आए प्रतिभागियों को बताया कि टेलीविजन, फिल्म और ड्रामा की एक्टिंग में काफी अंतर होता है। रंगमंच पर अभिनय करने की शैली और कैमरे के सामने कि एक्टिंग में अंतर होने की वजह से बॉडी लैंग्वेज में काफी बदलाव आ जाता है। डायलॉग डिलेवरी को लेकर उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि हर संवाद को गहराई और आत्मसात करके बोलना चाहिए। जिससे संबंधित चरित्र का निर्माण हो सके। वर्कशॉप में नाटक के अलावा नृत्य की विधाआें से सिंधु धौलपुरे और शुभ्रा गुहा ने कथक, नृत्य नाटिका और भरतनाट्यम के विधाओं को समझाया।

कॉमेडी में टायमिंग है इंपोर्टेंट आॅब्जेक्ट
थियेटर वर्कशॉप में डायलॉग डिलेवरी के लिए भी एक सेशन आयोजित किया गया। जिसमें शहर की वरिष्ठ लेखिका और साहित्यकार सुमन ओबेरॉय के लिखे कॉमेडी नाटक ‘बर्थडे’ के संवादों को पढ़ा गया। रंगकर्मी शरद बाघेला ने बताया कि कॉमेडी के नाटकों में टायमिंग सबसे इंपोर्टेंट भाग होता है। यदि समय पर और सही हाव-भाव के साथ डायलॉग डिलेवरी होगी तभी कॉमेडी का पंच निकलकर दर्शकों के सामने आएगा। यदि टायमिंग मिस होती है तो वह संवाद दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाएगा।

एक्सपर्ट रखेंगे रियालिस्टीक मिथेड पर व्यू
थियेटर वर्कशॉप में आने वाले दिनों एक्सपर्ट द्वारा रियालिस्टीक मिथेड के बारे में भी बताया जाएगा। जिसमें मुंबई के कलाकारों के अलावा भोपाल के वरिष्ठ रंगकर्मी, अभिनेता, सेट डिजाईनर, लाईट डिजाइनर समेत नेपथ्य से जुड़े एक्सपर्ट समय समय टिप्स देते रहेंगे।

/ Madhya_Pradesh      Oct 14 ,2017 00:10