मैं डेरे में नहीं रहना चाहती, लेकिन वे मुझे छोड़ना नहीं चाहते, कलेक्टर की जनसुनवाई में आया मामला / Madhya_Pradesh

मैं डेरे में नहीं रहना चाहती, लेकिन वे मुझे छोड़ना नहीं चाहते, कलेक्टर की जनसुनवाई में आया मामला

@lionnews.in

भोपाल/इंदौर। बाबा राम रहिम के डेरे के बाद डेरा   शब्द सुनते ही बाबाओं का मायाजाल याद आता है। लेकिन मध्यप्रदेश में किन्नरों के डेरों में ऐसे किन्नर परेशान है। उसे घर-घर मांगने के बजाय नौकरी या खुद का रोजगार करना ज्यादा पसंद हैं। वह भी पढ़-लिखकर समाज की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं। लेकिन उन्हीं के समुदाय के लोग उनकी इस विचारधारा में आड़े आते हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर जिलें का हैं जहा कलेक्टर की जनसुनवाई में सुनीता नामक किन्नर ने साहब के सामने अपनी समस्या को रखा।

किन्नर सुनीता इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र से जनसुनवाई में पहुची उसने कलेक्टर निशांत वरवड़े से गुहार लगाई। सुनीता ने कहा कि मैं किन्नरों के डेरे में नहीं रहना चाहती, लेकिन वे मुझे छोड़ना नहीं चाहते। मुझे डेरे में रहने के लिए दबाव बना रहे हैं। साहब मैं यहां से आजाद होना चाहती हूं। किन्नरों के साथ इधर-उधर जाकर मांगने में मुझे शर्म महसूस होती है। मैंने बीए फर्स्ट ईयर कर लिया और आगे की पढ़ाई कर नौकरी करना चाहती हूं, लेकिन डेरे की अन्य किन्नर मुझे बाहर नहीं आने दे रहे।

इस पर कलेक्टर ने कहा कि हम आपको नौकरी तो नहीं दे पाएंगे। आप चाहें तो हम स्वरोजगार के लिए लोन दिलवा सकते हैं। किन्नर सुनीता इसके लिए तैयार हो गई और कहा- मैं सिलाई जानती हूं। कलेक्टर ने उसकी जरूरत के हिसाब से 1 लाख तक का लोन दिलाने का आश्वासन दिया। कलेक्टर ने एडीएम को निर्देश दिए कि वे पुलिस के साथ समन्वय कर किन्नर डेरों के साथ बैठक कर समस्या का हल निकालें।

/ Madhya_Pradesh      Sep 05 ,2017 15:19