बुंदेलखंड के किसानों पर कर्ज हुआ भारी, आत्महत्या करते किसानों में और कितनों की बारी / Madhya_Pradesh

बुंदेलखंड के किसानों पर कर्ज हुआ भारी, आत्महत्या करते किसानों में और कितनों की बारी

lionnews.in / लॉयन न्यूज … भोपाल। मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड का इलाका आत्महत्या में नये रिकार्ड बना रहा है। किसानों की आत्महत्या की बुरी खबरों से पूरे प्रदेश के अखबर भरे पड़े हैं। बुंदेलखंड में पिछले दो हफतों में कई किसानों ने आत्महत्या की। सबसे बड़ी बात यह हंै कि इन सभी ने कर्ज में फंसे होने के चलते मौत को गले लगाया है। इस क्षेत्र में आत्महत्या करते किसानों में और कितनों की बारी आऐगी यह कहना अभी कठीन है। वहीं सरकार कोई ठोस कदम उठाती नहीं दिख रही है। गुलई कुर्मी मध्यप्रदेश के सागर जिलें के खिमलासा थाना के गांव बसाहरी की निवासी थी। उन्होंने फांसी लगा कर अपनी जान दे दी। कुर्मी पर लगभग आठ लाख का कर्ज था। जिससे कर्ज लिया उसने धोखे से जमीन हड़प ली। सरकारी बैंक से लोन उठाया तो बैंक टेक्टर खीच कर ले गए। इतना ही नहीं साहूकार का व्याज इतना बढ़ा कि आने वाली पीढ़ी भी कर्ज ना चुका पाए। यह सब बाते उस समय सामने आई जब मृतक गुलई कुर्मी के द्वारा आत्महत्या से पूर्व लिखे पत्र सामने आया। ऐसी ही कहानी प्रेमनारायण अहिरवार की है। वह सागर जिले के खुरई क्षेत्र के गांव सेमराघाट के निवासी थे। अहिरवार ने टेन से कटकर आत्महत्या कर ली। मृतक के पास से साहूकारों के गिरवीनामें की कई रसीदें बरामद हुई। जिन्हें देख कर पता चलता है कि जमीन सहित जेवरात गिरवी रखे गये थैै। कुछ इसी तरह कर्ज ने छतरपुर निवासी महेश द्विवेदी, बिजावर थाना के ग्राम पाली निवासी रघुवीर यादव, टीकमगढ़ जिले के ग्राम फुटेर निवासी बारेलाल अहिरवार, ग्राम ढाना के धरमू ठाकुर और खाकरोन निवासी लक्ष्मण पाल, पन्ना जिले के सिमराखुर्द के संतोष प्रजापति व दशरथ ढीमर निवासी ग्राम हरीरा, सागर जिले के राहतगढ़ थाना गांव के परशुराम साहू को मौत के गले लगाने पर विवश कर दिया। पिछले 17 दिनों के अंदर पांच जिलों में 11 किसान मौंत को गले लगा चुके है। आकड़े से समझे आत्महत्या के कारण त्र सरकारी बैंकों ने बर्ष- 2014.2015 के दौरान सागर में 22142.32 छतरपुर में 35061.56 दमोह मे 21445.08, पन्ना में 20842.13 ओर टीकगढ़ जिले में 21333ण्32 लाख रूपये का कर्ज बांटा। हालाकि सहकारी बैंकों के बकायादारों में अन्य ऋण की राशि भी समाहित है, पर किसानों के ऋण की राशि भ्ज्ञी कम नहीं है। बुंदेलखं डमें खेती से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। इस सच को स्वीकारने के लिए सरकारी आंकड़े ही गवाही देते है। 2015-16 में छतरपुर में 5.45 मेंसे 3.81 दमाह में 5.40 में से 3.19 सामर में 9.25 में से 5.47 , पन्ना में 3.75 में से 2.55 एवं टीकमगढ़ जिलें में 3.61 में से 2.55 लाख हेक्टेयर जमीन पर ही खेती हुई है।
/ Madhya_Pradesh      Jul 10 ,2017 05:23