इसी देश में कृष्ण हुये हैं, इसी देश में राम Dindori / Madhya_Pradesh

इसी देश में कृष्ण हुये हैं, इसी देश में राम

इसी देश में कृष्ण हुये हैं, इसी देश में राम| सबसे पहिले जाना जग ने, इसी देश का नाम| इसी देश में भीष्म सरीखे, दृढ़ प्रतिग्य भी आये| इसी देश में भागीरथ, धरती पर गंगा लाये| इसी देश में हुये कर्ण से, धीर वीर और दानी| इसी देश में हुये विदुर से, वेद ब्यास से ग्यानी| सत्य अहिंसा प्रेम सिखाना, इसी देश का काम| इसी देश में वीर शिवाजी, सा चरित्र भी आया| छत्रसाल जैसा योद्धा भी, भारत ने उपजाया| संरक्षण सम्मान सहित, शरणागत को देता है| जिसकी रक्षा में यह भारत, जान लगा देता है| इसी देश में मात पिता, होते हैं तीरथ धाम| इसी देश में हर बेटी, माँ दुर्गा की अवतारी| सावित्री सीता की प्रतिमा, भारत की हर नारी| वचन दिया तो उसे निभाने, सिर भी कटवा देते| भरत भूमि के वीर पुत्र हैं, इस धरती के बेटे| यहां भुगतना पड़ा दुष्ट को, पापों का परिणाम| इसी देश में कौशल्या सी, मातायें जनमी हैं| मातु यशोदा देवकी मां की, यही कर्म भूमि है| ध्रुव प्रहलाद सी दृढ़ प्रतिग्य, भारत मां की संतानें| महावीर गौतम गांधी भी, जनमें भारत मां ने| मनुज धर्म की रक्षा के हित, हुये घोर संग्राम| दया धर्म ईमान सचाई, हमने कभी न छोड़ी| प्रेम अहिंसा पर सेवा कि, डोर हमेशा जोड़ी| किसी पीठ पर धोखे से भी, हमने किया न वार| सदा सामने खड़े हुये हम, लड़ने को तैयार| भले हानियाँ लाख उठाईं, हुये दुखद अंजाम| सबसे पहिले जाना जग ने, इसी देश का नाम| --ललित राजपूत
Dindori / Madhya_Pradesh      Apr 19 ,2017 09:57